Sunday, 4 March 2018

समस्त सम्मानीय शिक्षकों को समर्पित पंक्तियां

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अनगढ़ पत्थर को ढालकर प्रतिमा कर देता है

सच्चा गुरु कांच को कोहिनूर हीरा कर देता है

अय्याशियों में डूब जाये गर राजा धनानंद कोई

चुटकियों में शिक्षक चन्द्रगुप्त खड़ा कर देता है

शिक्षकों पर थोपता है जो बेकार की हम्मालियाँ

वह राज्य नयी पीढ़ी को कूड़ा कचरा कर देता है

गुरु की शरण में आता है जो लोहा लंगड़ उसे

पारस की तरह छूकर वो सोना खरा कर देता है

शिक्षक बनाता है युवाओं को इंकलाबी और

वतन पर मर-मिटने का भाव गहरा कर देता है|

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