एक बार कही जा रहा था तो चलते चलते थक गया तो पास में पीपल के पेड़ की छांव में बैठ गया ।
वहां मैने पेड़ के नीचे भगवान की टूटी मूर्ति देखकर समझ में आया कि
परिस्थिति चाहे कैसी भी हो कभी अपने आप को टूटने मत देना ,
क्योंकि यह दुनिया टूटने पर भगवान को घर से निकाल सकती है तो फिर हमारी तो क्या ओकात है....?
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संभल कर चल नादान,
यह इंसानों की बस्ती हैं...
ये तो रब को भी आजमा लेते हैं,
तेरी क्या हस्ती हैं..........!
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© Kuldeep Riyar
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