Sunday, 25 March 2018

कभी भी खुद को टूटने मत दो

एक बार कही जा रहा था तो चलते चलते थक गया तो पास में पीपल के पेड़ की छांव में बैठ गया ।
वहां मैने पेड़ के नीचे भगवान की टूटी मूर्ति देखकर समझ में आया कि
परिस्थिति चाहे कैसी भी हो कभी अपने आप को टूटने मत देना ,
क्योंकि यह दुनिया टूटने पर भगवान को घर से निकाल सकती है तो फिर हमारी तो क्या ओकात है....?
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संभल कर चल नादान,
यह इंसानों की बस्ती हैं...

ये तो रब को भी आजमा लेते हैं,
तेरी क्या हस्ती हैं..........!
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© Kuldeep Riyar

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