किसान कमेरे मजदूर कौम के मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम जी के निर्वाण दिवस महान आत्माा को नमन करता हूं ।।
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कुलदीप रियाड़ खांगटा
कौम न छोड़ चला गया तू ना लाहौर त उलटा आया,
किया जोर कुदरत न दादा सांस तन्नै आगै ना आया,
9 जनवरी 1945 का वो दिन कति निर्भाग था आया,
रे रे माटी हुई किसान की तेरे जैसा और मुड़ कर ना आया।।
एक धर्मनिरपेक्ष महान जाती जो व्यवहार में भी धर्मनिरपेक्ष होती है जिसे पता ही नही होता कि धर्म किस बला का नाम है,उस के महानतम नेता का निधन ऐसे ही हो सकता था।
सर् सिकन्दर हयात के साथ मिलकर सर् छोटूराम ने अपने कार्यकाल में जो कानून किसान-मजदूरों की भलाई के लिए बनाए उस काल मे किसी सूबे की सरकार द्वारा बनाने की तो छोड़ा,वे इस बारे में सोच भी नही सकती।
एक चौथाई सदी तक सर् छोटूराम उस पार्टी के कर्ता धर्ता थे जो दूसरों के लिए मुसलमान बहुजन पार्टी थी।चौथाई सदी तक पंजाब की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे उस मसीहा के पास कुछ भी नही था।
सर् छोटूराम के निधन से यूनाइटेड पंजाब व भारत के किसान वर्ग का कितना बड़ा नुकसान हुआ उस का आंकलन करना बहुत मुश्किल है।
ये वो नुकसान था जिसके कारण आदमियों का बंटवारा हुआ।
इस बंटवारे को ग़ांधी,जिन्ना, नेहरू,मौलाना आजाद,पटेल ना तो रोक सकते थे ना उनसे रुकी।
बंटवारे को रोकने वाली सबसे बड़ी पार्टी थी यूनियनिस्ट पार्टी थी जिसके दोनों थिंक टैंक जा चुके थे।
सर् छोटूराम ने व्यवहारिक रूप से हिन्दू,मुसलमान व सिख किसान ताकत को एक किया था।
सर् छोटूराम एक महान मानसिकता के प्रतिबिंब थे और उनके जाने के 2 साल बाद ही 10 लाख लोगों का कत्लेआम हुआ।
दीनबन्धु, रहबरे आज़म ,किसान मसीहा,सर,चौधरी छोटूराम को
शत शत नमन
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लेखक
कुलदीप रियाड़ खांगटा
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