Tuesday, 2 January 2018

नमन किसान मसीहा चौधरी चरणसिंह जी

गरीब किसान मजदूरों के मसीहा चौधरी चरण
सिँह जी की जयंती पर उन्हेँ शत शत नमन ।
.

23 दिसम्बर 1902 को जब उतर प्रदेश राज्य के
मेरठ जिले मेँ नुरपुर गांव स्थित मीरसिँह
चौधरी की अनगढ और फूस वाली झौँपङी मेँ एक
बालक का जन्म हुआ तब शायद किसी ने
नहीँ सोचा होगा की इस झौंपङी का लाल एक
दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा ...और गरीब
किसान कौम का सिर गर्व से ऊँचा कर देगा .....
जो व्यक्ति जीवन भर अपने देश मेँ मौजूद
किसानों व गरीबों के लिए संघर्ष
करता रहा ,,उनके शोषण को देख देखकर
जिसकी आत्मा तङफती रही ...जिसने अपने मन
को सदा गांव की मिट्टी मेँ रमाये रखा ...सदा देश
की खुशहाली की दुआ करता रहा ...भारतीय
सभ्यता व संस्कृति जिसके रग रग मेँ
बसी रही .....ऐसी महात्मा को याद करके मन
खुशी के चरम पर पहुँच रहा है ।

चौधरी चरणसिँह जी के दिलोदिमाग मेँ एक बात
सदा घूमती रही की ...''देश
की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं
खलिहानों से होकर गुजरता है '' इसी सोच
को ध्यान मेँ रखकर उन्होंने किसानों के लिए
आजीवन संघर्ष किया ...और किसानों के लिए
इतना कुछ कर गये जो किसी अन्य व्यक्ति के लिए
करना संभव नहीँ ।

चौधरी साहब एक संवेदशील इंसान होने के साथ
पढे लिखे विद्वान व्यक्ति थे ...विज्ञान मेँ
स्नातक ,इतिहास मेँ एम ए होने के साथ
ही विधि मेँ स्नातक थे ......1928 मेँ गाजियाबाद
मेँ उन्होंने वकालात शुरू की ...पर पैसे के लिए
नहीँ ......किसानों को आपस मेँ लङते हुए व
पैसों का दुरूपयोग करते देखकर उनका दिल दर्द से
भर जाता था ...उन्होंने हजारों मामले केवल
उनकी आपसी सहमति से ही सुलझा दिये .....वह
कभी भी अन्यायपूर्ण पक्ष की पैरवी नहीँ करते थे
चाहे कोई कितनी ही फीस दे रहा होता .....और
आज के जमाने मेँ ....!!
किसान मसीहा चौधरी चरणसिँह ने किसानों के
लिए जितना किया आज के किसान नेता शायद
उनके किये का एक प्रतिशत भी नहीँ कर
पायेँ ....1939 का ऋण विमोचक विधेयक पास
करवा कर किसानों के खेतों को नीलामी से
बचवाना हो या ...सरकारी नौकरी मेँ
किसानों के बच्चों के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण
की मांग करना ....या किसानों को इजाफा लगान
व बेदखली के अभिशाप से
मुक्ति दिलवाना हो ...उनका हर एक कदम
किसानों की खुशहाली के लिए उठता था .1979 मेँ
नाबार्ड की स्थापना करना ...उनका किसानों के
प्रति संवेदनशीलता का एक अनुपम उदाहरण
है..1952 का जंमीदारी उन्मुलन अधिनियम पास
करवाने का कार्य चौधरी साहब जैसा जीँवत
व्यक्तित्व
ही करा सकता है ...

.किसानों की प्रगति और
खुशहाली के लिए अपना जीवन अर्पित करना काश
कोई चौधरी साहब से सीखता ...अनूठी मिशाल ..।
चौधरी साहब को किसान गरीब के
प्रति जितनी हमदर्दी थी उतना ही प्यार
उनको अपने वतन की मिट्टी से
था ....ब्रितानिया हुकुमत को उखाङ
फेँकना उनकी जिँदगी का मकसद बन
चुका था ....1930 मेँ गांधी जी द्वारा चलाये गये
सविनय अवज्ञा आंदोलन मेँ उन्होंने बढचढ कर भाग
लिया ..गाजियाबाद सीमा पर बहने
वाली हिँडन नदी पर नमक बनाकर
अंग्रेजों को उनकी औकात बताई ...पकङे
भी गये ..छह माह की जेल हुई ....पर जेल से छूटते
ही यह शेर और खुंखार हो गया ...और गौरौं को देश
से भगाने का प्रण लिया ....1940 के व्यक्तिगत
सत्याग्रह मेँ भी गिरफ्तार हुए ......पर
युवा चरणसिँह कहां मानने वाले थे ...उन के सिर पर
तो भारत मां को आजाद देखने का भूत सवार
हो चुका था .....पुलिस पीछा करती रही पर चरण
सिँह भूमिगत होकर गुप्त क्रांतिकारी संगठन
तैयार करने मेँ लगे रहे ...गाजियाबाद मेरठ हापुङ
जैसे शहरों व आसपास के गांवों मेँ उन्होंने आजादी के
दिवानों की फौज तैयार कर दी ।
चौधरी चरण सिँह आखिर गिरफ्तार हुए और उन्हेँ
डेढ साल की सजा हुई ....जेल मेँ रहते हुए उन्होंने
'शिष्टाचार' नामक एक पुस्तक
भी लिखी .....जिसमेँ उन्होंने भारतीय सभ्यता व
संस्कृति की एक झलक दुनियां के सामने रखी ।

राजनीति का कोई ऐसा प्रमुख पद
नहीँ रहा जिस पर चौधरी साहब आसिन्न ना हुए
हो ....दो बार उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री रहे ..केन्द्र मेँ गृहमंत्री रहे वित्त
मंत्री रहे ..उप प्रधानमंत्री रहे ..और किसान
का यह बेटा देश का प्रधानमंत्री भी बना ।
23 दिसम्बर उनके जन्मदिन पर किसान दिवस
मनाया जाता है ..जो उनके लिए देश
की जनता द्वारा सम्मान है ...कुछ युनिवरसिटीज
और कालेज भी उनके नाम से चल रहे है .....फिर
भी बङे दुख की बात है कि इतने महान नेता के बारे
मेँ यूपी को छोङकर किसी अन्य राज्य के
स्कूली पाठयक्रम मेँ
नहीँ पढाया जाता ...दिल्ली की तुगलक रोङ
की 12 वीँ कोठी इस महात्मा का स्मारक बनने
को तरस जाती है ..यह बहुत दुखदायी है ...

आओ हम सब मिलकर चौधरी साहब
की विचारधारा को आगे बढाते हुए देश
की खुशहाली को चार चांद लगाये ..उनके लिए
यही सच्ची श्रदांजली होगी ।
चौधरी चरणसिँह अमर रहे ।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
Kuldeep Riyar Khangta

No comments:

Post a Comment