ऐसे थे चौधरी छोटू राम जिनको दिन-रात हर बिरादरी के किसानो की फसल के सही मूल्य दिलवाने की चिंता लगी रहती थी। ये घटना हमे सोचने पर मजबूर कर देंगी कि कैसे उस महान योद्धा ने किसानो की लडाई लडी होगी सच मे वो किसानो के मसीहा थे।
सन 1939 में दूसरा विश्वयुद्ध आरंभ हो गया | वाइसराय बैवल ने सारे भारत के प्रान्तों के प्रीमियरों की मीटिंग बुलाई | मद्रास से श्री राजगोपालचार्य आये और पंजाब से चौधरी छोटूराम | वाइसराय यह चाहता था कि युद्ध जरूरत के लिए खाध्यवस्तुओं विशेषकर गेहूं का भाव सस्ते से सस्ता किया जावे | गेहूं सरकार ने खरीदना था | वह 6 रुपया प्रति मन का भाव नियत करना चाहते थे | श्री राजगोपालचर्य पार्टी के प्रतिनिधि थे | उन्होने वाइसराय का सुझाव मान लिया | चौधरी छोटूराम इसका विरोध किया और कहा कि गेहूं मद्रास नहीं , पंजाब का किसान पैदा करता हैं | 10 रूपये प्रति मन से कम का गेहूं नहीं देंगे | वाइसराय ने दबाव ही नहीं दिया बल्कि धम्की भी दी कि हमें युद्ध में व्यापारी वर्ग की सहायता लेनी हैं | वे भाव सस्ता चाहते हैं | सरकार लड़ाई में इतना महंगा भाव नहीं देगी और किसान को सरकारी भाव पर गेहूं देना पड़ेगा | चौधरी छोटूराम ने उत्तर में कहा कि हमने व्यापारी का नहीं किसान का लाभ देखना हैं | किसान युद्ध के लिए जवान भी दे और घाटा खा कर गेहूं भी दे , दोनों बात नहीं हो सकती | लड़ाई व्यापारी से नहीं किसानों के बेटों से जीती जाएगी | चौधरी साहब का इस विषय पर टकराव हो गया | चौधरी साहब मीटिंग में से खड़े हो गए और कह दिया कि मैं 10 रूपये प्रति मन से कम किसान का गेहूं नहीं दूंगा | वरना खड़ी फसल में आग लगवा दूंगा |
चौधरी साहब मीटिंग से चले गए | वाइसराय ने चौधरी छोटूराम को गिरफ्तार करने का सुझाव दिया | सरदार सिकंदर हयात खान वाइसराय के पास गए | उसको चौधरी छोटूराम के प्रभाव और लोकप्रियता से अवगत कराया कि चौधरी छोटूराम पंजाब के किसान और सिपाही का महान नेता हैं | सरदार सिकंदर हयात खान ने बताया कि इसको बुलाकर समझौता करना ही ठीक है, क्योंकि यह बहुत अडिय़ल जाट है। जो मुंह से शब्द निकाल देता है, उन्हें हर हालत में पूरा करता है। जब लार्ड वेवल ने उन्हें पुन: बुलाया तो सर छोटूराम ने कहा कि बाहर खड़े किसान गेहूं का मूल्य 11 रुपए प्रति मण लेने पर अड़े हुए हैं और तो और अब तो मुझे भी उनकी बात अच्छी लग रही है। और अब तो हम 11 रुपए प्रति मण के भाव लेंगे। लार्ड वेवल को मजबूर होकर 11 रुपए प्रति मण गेहूं का भाव स्वीकार करना पड़ा | ऐसा था चौधरी छोटूराम का नेतृत्व |
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कुलदीप रियाड़
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