Saturday, 27 January 2018

वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर एक कहानी

आज  का यह ब्लॉग आपको सोचने को मजबूर कर देगा कि वर्तमान घिरती हुई राजनीति व्यवस्था का जिम्मेदार कोन है ? 
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एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??

यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !

भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।

वह जोर से चिल्लाने लगा।

हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।

ये उल्लू चिल्ला रहा है।

हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??

ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।

पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।

सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।

हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!

यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा

पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।

हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??

अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!

उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।

कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।

पंचलोग भी आ गये!

बोले- भाई किस बात का विवाद है ??

लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!

लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।

हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।

इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!

फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।

उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!

रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!

हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??

पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?

उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!

लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!

मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।

यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!
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शायद 65 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!
मित्रो यह लोकतंत्र है , इसमें हम मत देने का अधिकार है इसलिए सच्चे को चुने अच्छे को चुने
#जिंदा कोम पांच साल इंतजार नहीं करती ।
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कुलदीप रियाड़ खांगटा

Tuesday, 16 January 2018

किसान केसरी बलदेव राम मिर्धा की जयंती पर नमन

जगत झुरे विनती करे, धीन धीन धरती धाम...
एकर पाछो आवजे, जग में मिर्धा बलदेवराम...

महान स्वतंत्रता सेनानी, मरूभूमी में एक अवतार - किसान केसरी बलदेवराम जी मिर्धा को 129 वीं जयंती (किसान क्रांति दिवस) पर श्रद्धांजलि, नमन् . . .
किसान केसरी बलदेवराम जी गांव, गरीब व किसान पर उस समय हो रहे अत्याचार शोषण के खिलाफ एक अवतार थे, जिन्होंने उस जमाने में पुलिस विभाग में DIG के पद से त्याग पत्र देकर आजादी का प्रचार प्रसार किया व जागीरदारी प्रथा को समाप्त करने का प्रचार प्रसार कर लोगों को जागृत किया ओर सामाजिक कुरितियों के खात्में व शिक्षा के लिए अनेक जगहों पर किसान छात्रावासो का निर्माण करवाया ।
वे किसान जागृति के अग्रदूत थे जिन्होंने किसान में अन्याय व अत्याचार के खिलाफ लोगों को जागरूक कर उनमें स्वाभिमान जागृत किया ।
वे किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं थे वे उस समय के शोषण करने वालो के खिलाफ थे ओर दुषित व्यवस्था के खिलाफ थे व पीड़ित व गरीब लोगों के साथ थे, उनमें सामाजिक व शैक्षणिक जागृति के लिए एक क्रांति के सुत्रधार अवतार थे ।
हमें महान स्वतंत्रता सेनानी के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने चाहिए व सामाजिक कुरितियों को जड़ से समाप्त करना होगा ।
पुनः किसान केसरी बलदेवराम जी मिर्धा को जयंती पर नमन ।
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Kuldeep Riyar Khangta
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Sunday, 14 January 2018

रहबरे आजम , दीनबंधु चौधरी छोटूराम की नेतृत्व क्षमता

ऐसे थे  चौधरी छोटू राम जिनको दिन-रात हर बिरादरी के किसानो की फसल के सही मूल्य दिलवाने की चिंता लगी रहती थी। ये घटना हमे सोचने पर मजबूर कर देंगी कि कैसे उस महान योद्धा ने किसानो की लडाई लडी होगी सच मे वो किसानो के मसीहा थे।

        सन 1939 में दूसरा विश्वयुद्ध आरंभ हो गया | वाइसराय बैवल ने सारे भारत के प्रान्तों के प्रीमियरों की मीटिंग बुलाई | मद्रास से श्री राजगोपालचार्य आये और पंजाब से चौधरी छोटूराम | वाइसराय यह चाहता था कि युद्ध जरूरत के लिए खाध्यवस्तुओं विशेषकर गेहूं का भाव सस्ते से सस्ता किया जावे | गेहूं सरकार ने खरीदना था | वह 6 रुपया प्रति मन का भाव नियत करना चाहते थे | श्री राजगोपालचर्य पार्टी के प्रतिनिधि थे | उन्होने वाइसराय का सुझाव मान लिया | चौधरी छोटूराम इसका विरोध किया और कहा कि गेहूं मद्रास नहीं , पंजाब का किसान पैदा करता हैं | 10 रूपये प्रति मन से कम का गेहूं नहीं देंगे | वाइसराय ने दबाव ही नहीं दिया बल्कि धम्की भी दी कि हमें युद्ध में व्यापारी वर्ग की सहायता लेनी हैं | वे भाव सस्ता चाहते हैं | सरकार लड़ाई में इतना महंगा भाव नहीं देगी और किसान को सरकारी भाव पर गेहूं देना पड़ेगा | चौधरी छोटूराम ने उत्तर में कहा कि हमने व्यापारी का नहीं किसान का लाभ देखना हैं | किसान युद्ध के लिए जवान भी दे और घाटा खा कर गेहूं भी दे , दोनों बात नहीं हो सकती | लड़ाई व्यापारी से नहीं किसानों के बेटों से जीती जाएगी | चौधरी साहब का इस विषय पर टकराव हो गया | चौधरी साहब मीटिंग में से खड़े हो गए और कह दिया कि मैं 10 रूपये प्रति मन से कम किसान का गेहूं नहीं दूंगा | वरना खड़ी फसल में आग लगवा दूंगा |

चौधरी साहब मीटिंग से चले गए | वाइसराय ने चौधरी छोटूराम को गिरफ्तार करने का सुझाव दिया | सरदार सिकंदर हयात खान वाइसराय के पास गए | उसको चौधरी छोटूराम के प्रभाव और लोकप्रियता से अवगत कराया कि चौधरी छोटूराम पंजाब के किसान और सिपाही का महान नेता हैं | सरदार सिकंदर हयात खान ने बताया कि इसको बुलाकर समझौता करना ही ठीक है, क्योंकि यह बहुत अडिय़ल जाट है। जो मुंह से शब्द निकाल देता है, उन्हें हर हालत में पूरा करता है। जब लार्ड वेवल ने उन्हें पुन: बुलाया तो सर छोटूराम ने कहा कि बाहर खड़े किसान गेहूं का मूल्य 11 रुपए प्रति मण लेने पर अड़े हुए हैं और तो और अब तो मुझे भी उनकी बात अच्छी लग रही है। और अब तो हम 11 रुपए प्रति मण के भाव लेंगे। लार्ड वेवल को मजबूर होकर 11 रुपए प्रति मण गेहूं का भाव स्वीकार करना पड़ा | ऐसा था चौधरी छोटूराम का नेतृत्व |
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कुलदीप रियाड़

भगवान क्या है?

आजकल लोग मंदिर , मज्जिद अन्धविश्वाश ,पाखण्ड को ही भगवान समझने लग गये लेकिन वास्तविक तौर पर परिभाषा यही हैं कि
भ = भूमि
ग = गगन
व = वायु
अ = अग्नि
न = नीर
भ+ग+व +अ+न =भगवान =प्रकर्ति=अपने चारों तरफ का सब कुछ हैं। 
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कुलदीप रियाड़ खांगटा

Tuesday, 9 January 2018

नमन रहबरे आजम , दीनबंधु , सर , चौधरी छोटूराम

किसान कमेरे मजदूर कौम के मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम जी के निर्वाण दिवस  महान आत्माा को नमन करता हूं ।।
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कुलदीप रियाड़ खांगटा
कौम न छोड़ चला गया तू ना लाहौर त उलटा आया,

किया जोर कुदरत न दादा सांस तन्नै आगै ना आया,

9 जनवरी 1945 का वो दिन कति निर्भाग था आया,

रे रे माटी हुई किसान की तेरे जैसा और मुड़ कर ना आया।।

एक धर्मनिरपेक्ष महान जाती जो व्यवहार में भी धर्मनिरपेक्ष होती है जिसे पता ही नही होता कि धर्म किस बला का नाम है,उस के महानतम नेता का निधन ऐसे ही हो सकता था।
सर् सिकन्दर हयात के साथ मिलकर सर् छोटूराम ने अपने कार्यकाल में जो कानून किसान-मजदूरों की भलाई के लिए बनाए उस काल मे किसी सूबे की सरकार द्वारा बनाने की तो छोड़ा,वे इस बारे में सोच भी नही सकती।
एक चौथाई सदी तक सर् छोटूराम उस पार्टी के कर्ता धर्ता थे जो दूसरों के लिए मुसलमान बहुजन पार्टी थी।चौथाई सदी तक पंजाब की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे उस मसीहा के पास कुछ भी नही था।
सर् छोटूराम के निधन से यूनाइटेड पंजाब व भारत के किसान वर्ग का कितना बड़ा नुकसान हुआ उस का आंकलन करना बहुत मुश्किल है।
ये वो नुकसान था जिसके कारण आदमियों का बंटवारा हुआ।
इस बंटवारे को ग़ांधी,जिन्ना, नेहरू,मौलाना आजाद,पटेल ना तो रोक सकते थे ना उनसे रुकी।
बंटवारे को रोकने वाली सबसे बड़ी पार्टी थी यूनियनिस्ट पार्टी थी जिसके दोनों थिंक टैंक जा चुके थे।
सर् छोटूराम ने व्यवहारिक रूप से हिन्दू,मुसलमान व सिख किसान ताकत को एक किया था।
सर् छोटूराम एक महान मानसिकता के प्रतिबिंब थे और उनके जाने के 2 साल बाद ही 10 लाख लोगों का कत्लेआम हुआ।

दीनबन्धु, रहबरे आज़म ,किसान मसीहा,सर,चौधरी छोटूराम को
शत शत नमन
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लेखक
कुलदीप रियाड़ खांगटा

Tuesday, 2 January 2018

नमन किसान मसीहा चौधरी चरणसिंह जी

गरीब किसान मजदूरों के मसीहा चौधरी चरण
सिँह जी की जयंती पर उन्हेँ शत शत नमन ।
.

23 दिसम्बर 1902 को जब उतर प्रदेश राज्य के
मेरठ जिले मेँ नुरपुर गांव स्थित मीरसिँह
चौधरी की अनगढ और फूस वाली झौँपङी मेँ एक
बालक का जन्म हुआ तब शायद किसी ने
नहीँ सोचा होगा की इस झौंपङी का लाल एक
दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा ...और गरीब
किसान कौम का सिर गर्व से ऊँचा कर देगा .....
जो व्यक्ति जीवन भर अपने देश मेँ मौजूद
किसानों व गरीबों के लिए संघर्ष
करता रहा ,,उनके शोषण को देख देखकर
जिसकी आत्मा तङफती रही ...जिसने अपने मन
को सदा गांव की मिट्टी मेँ रमाये रखा ...सदा देश
की खुशहाली की दुआ करता रहा ...भारतीय
सभ्यता व संस्कृति जिसके रग रग मेँ
बसी रही .....ऐसी महात्मा को याद करके मन
खुशी के चरम पर पहुँच रहा है ।

चौधरी चरणसिँह जी के दिलोदिमाग मेँ एक बात
सदा घूमती रही की ...''देश
की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं
खलिहानों से होकर गुजरता है '' इसी सोच
को ध्यान मेँ रखकर उन्होंने किसानों के लिए
आजीवन संघर्ष किया ...और किसानों के लिए
इतना कुछ कर गये जो किसी अन्य व्यक्ति के लिए
करना संभव नहीँ ।

चौधरी साहब एक संवेदशील इंसान होने के साथ
पढे लिखे विद्वान व्यक्ति थे ...विज्ञान मेँ
स्नातक ,इतिहास मेँ एम ए होने के साथ
ही विधि मेँ स्नातक थे ......1928 मेँ गाजियाबाद
मेँ उन्होंने वकालात शुरू की ...पर पैसे के लिए
नहीँ ......किसानों को आपस मेँ लङते हुए व
पैसों का दुरूपयोग करते देखकर उनका दिल दर्द से
भर जाता था ...उन्होंने हजारों मामले केवल
उनकी आपसी सहमति से ही सुलझा दिये .....वह
कभी भी अन्यायपूर्ण पक्ष की पैरवी नहीँ करते थे
चाहे कोई कितनी ही फीस दे रहा होता .....और
आज के जमाने मेँ ....!!
किसान मसीहा चौधरी चरणसिँह ने किसानों के
लिए जितना किया आज के किसान नेता शायद
उनके किये का एक प्रतिशत भी नहीँ कर
पायेँ ....1939 का ऋण विमोचक विधेयक पास
करवा कर किसानों के खेतों को नीलामी से
बचवाना हो या ...सरकारी नौकरी मेँ
किसानों के बच्चों के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण
की मांग करना ....या किसानों को इजाफा लगान
व बेदखली के अभिशाप से
मुक्ति दिलवाना हो ...उनका हर एक कदम
किसानों की खुशहाली के लिए उठता था .1979 मेँ
नाबार्ड की स्थापना करना ...उनका किसानों के
प्रति संवेदनशीलता का एक अनुपम उदाहरण
है..1952 का जंमीदारी उन्मुलन अधिनियम पास
करवाने का कार्य चौधरी साहब जैसा जीँवत
व्यक्तित्व
ही करा सकता है ...

.किसानों की प्रगति और
खुशहाली के लिए अपना जीवन अर्पित करना काश
कोई चौधरी साहब से सीखता ...अनूठी मिशाल ..।
चौधरी साहब को किसान गरीब के
प्रति जितनी हमदर्दी थी उतना ही प्यार
उनको अपने वतन की मिट्टी से
था ....ब्रितानिया हुकुमत को उखाङ
फेँकना उनकी जिँदगी का मकसद बन
चुका था ....1930 मेँ गांधी जी द्वारा चलाये गये
सविनय अवज्ञा आंदोलन मेँ उन्होंने बढचढ कर भाग
लिया ..गाजियाबाद सीमा पर बहने
वाली हिँडन नदी पर नमक बनाकर
अंग्रेजों को उनकी औकात बताई ...पकङे
भी गये ..छह माह की जेल हुई ....पर जेल से छूटते
ही यह शेर और खुंखार हो गया ...और गौरौं को देश
से भगाने का प्रण लिया ....1940 के व्यक्तिगत
सत्याग्रह मेँ भी गिरफ्तार हुए ......पर
युवा चरणसिँह कहां मानने वाले थे ...उन के सिर पर
तो भारत मां को आजाद देखने का भूत सवार
हो चुका था .....पुलिस पीछा करती रही पर चरण
सिँह भूमिगत होकर गुप्त क्रांतिकारी संगठन
तैयार करने मेँ लगे रहे ...गाजियाबाद मेरठ हापुङ
जैसे शहरों व आसपास के गांवों मेँ उन्होंने आजादी के
दिवानों की फौज तैयार कर दी ।
चौधरी चरण सिँह आखिर गिरफ्तार हुए और उन्हेँ
डेढ साल की सजा हुई ....जेल मेँ रहते हुए उन्होंने
'शिष्टाचार' नामक एक पुस्तक
भी लिखी .....जिसमेँ उन्होंने भारतीय सभ्यता व
संस्कृति की एक झलक दुनियां के सामने रखी ।

राजनीति का कोई ऐसा प्रमुख पद
नहीँ रहा जिस पर चौधरी साहब आसिन्न ना हुए
हो ....दो बार उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री रहे ..केन्द्र मेँ गृहमंत्री रहे वित्त
मंत्री रहे ..उप प्रधानमंत्री रहे ..और किसान
का यह बेटा देश का प्रधानमंत्री भी बना ।
23 दिसम्बर उनके जन्मदिन पर किसान दिवस
मनाया जाता है ..जो उनके लिए देश
की जनता द्वारा सम्मान है ...कुछ युनिवरसिटीज
और कालेज भी उनके नाम से चल रहे है .....फिर
भी बङे दुख की बात है कि इतने महान नेता के बारे
मेँ यूपी को छोङकर किसी अन्य राज्य के
स्कूली पाठयक्रम मेँ
नहीँ पढाया जाता ...दिल्ली की तुगलक रोङ
की 12 वीँ कोठी इस महात्मा का स्मारक बनने
को तरस जाती है ..यह बहुत दुखदायी है ...

आओ हम सब मिलकर चौधरी साहब
की विचारधारा को आगे बढाते हुए देश
की खुशहाली को चार चांद लगाये ..उनके लिए
यही सच्ची श्रदांजली होगी ।
चौधरी चरणसिँह अमर रहे ।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
Kuldeep Riyar Khangta