Kuldeep Riyar is young writer and public speaker from Rajasthan (India). Young, Energetic, Student, social worker, and Inspiring. His blogs and views on public issue usually covers broad spectrum of public sentiment. This is his official Blogger. This Blogger sharing his Article , Quotation , Story, Untold incident related to the life of great men revolutionaries and Poems on public issue. Give your feedback for high quality blogs in comments . Thanks ♥️
Friday, 27 December 2019
Inspiration from hawk 's life : Kuldeep Riyar बाज के जीवन से प्रेरणा : कुलदीप रियाड़
Monday, 21 October 2019
क्रान्तिकारी अमर शहीद अशफाकुल्लाह ख़ाँ की जयंती पर कोटि कोटि नमन : कुलदीप रियाड़
Wednesday, 24 July 2019
देश की बेटी : हिमा दास ।। Country's daughter : Hima das ।। kuldeep riyar।।
यही लड़की अगर प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, या प्रिया प्रकाश होती तो सोशल मीडिया पर रातों-रात छा जाती...लेकिन जनाब यह तो एक गरीब किसान की बेटी है, जिसने फेसबुक या इंस्टाग्राम पर बिना डबल फिल्टर के, बिना नारीवादी कविता के अपनी फोटो अपलोड किए हुए भारत का नाम रोशन किया है...वह भी दो हफ्तों में 5 स्वर्ण पदक जीतकर...पर हैरानी की बात यह है कि अधिकतर लोगो को इसकी जानकारी तक नहीं है !
धन्य है असम का वह धान उगाने वाला एक गरीब किसान परिवार, जिसने एक दृढ़ संकल्पित और जिद्दी खिलाड़ी भारत को दिया है...जिसके लिए यह मुल्क उनका कर्जदार रहेगा !
उसके पास सप्लीमेंट और प्रोटीन कभी नहीं थे, वो सिर्फ दाल-चावल खाकर इस मुकाम तक पहुँची है...वह स्टेडियम के पक्के ट्रैक पर नहीं दौड़ पाई, क्योंकि उसके लिए तो खेतों के कच्चे रास्ते ही उसके अपने और अपने देश के सपने पूरे करने के लिए काफी थे...उसने कभी समाज, अपने माँ-बाप और परिस्थितियों को नहीं गलियाया, बल्कि अपने जुनून और हुनर से हालात को, जमाने को निरुत्तर कर अपना इकबाल बुलंद किया !
जब उसने देश के लिए विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थी, क्योंकि बैकग्राउंड में राष्ट्रीय गान चल रहा था...ये आँसूं गोल्ड मेडल के कारण नही थे; बल्कि ये आँसूं भारत का नाम रौशन करने के लिए थे, मुल्क के सम्मान में थे...इतना ही नहीं, उसके मन में मुल्क के लिए अपनापन और मिट्टी से जुड़ाव इतना गहरा है कि हाल ही में असम में आई बाढ से पीड़ितों के लिए अपने पदक की राशि भी दान कर दी !
इसे कहते हैं, देश की बिटिया ! स्वर्णपरी !
Wednesday, 29 May 2019
भारतीय राजनीति के वास्तविक चौधरी - चौधरी चरण सिंह
चौधरी का मतलब, जो हल की चऊँ को धरा पर चलाता है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी के पास संपति के नाम पर उनके पिता मीर सिंह से विरासत में मिले नैतिक मूल्यों के संस्कार थे।
चौधरी चरण सिंह के जीवन चरित्र के कुछ महत्वपूर्ण कथन......
✍️असली भारत गांवों में रहता है।
✍️अगर देश को उठाना है तो पुरुषार्थ करना होगा।
✍️राष्ट्र तभी संपन्न हो सकता है जब उसके ग्रामीण क्षेत्र का उन्नयन किया गया हो तथा ग्रामीण क्षेत्र की क्रय शक्ति अधिक हो।
✍️किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होगी तब तक देश की प्रगति संभव नहीं है।
✍️किसानों की दशा सुधरेगी तो देश सुधरेगा।
✍️किसानों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ती तब तक औधोगिक उत्पादों की खपत भी संभव नहीं है।
✍️भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है जिस देश के लोग भ्रष्ट होंगे वो देश कभी, चाहे कोई भी लीडर आ जाये, चाहे कितना ही अच्छा प्रोग्राम चलाओ … वो देश तरक्की नहीं कर सकता।
✍️चौधरी का मतलब, जो हल की चऊँ को धरा पर चलाता है।
हरिजन लोग, आदिवासी लोग, भूमिहीन लोग, बेरोजगार लोग या जिनके पास कम रोजगार है और अपने देश के 50% फीसदी किसान जिनके पास केवल 1 हैक्टेयर से कम जमीन है … इन सबकी तरफ सरकार विशेष ध्यान होगा
✍️सभी पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों को अपने अधिकतम विकास के लिये पूरी सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
✍️किसान इस देश का मालिक है, परन्तु वह अपनी ताकत को भूल बैठा है।
✍️देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों एवं खलिहानों से होकर गुजरता है।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को उनकी 32 वी पुण्य तिथि पर कोटि कोटि वंदन करता हूँ......
कुलदीप रियाड़
Kuldeep riyar
Friday, 10 May 2019
चौधरी कुम्भाराम आर्य जयंती : कुलदीप रियाड़ Choudhary kumbharam aarya 's birth anniversary : Kuldeep riyar
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चौधरी कुम्भाराम के बचपन का एक किस्सा जो मैंने उनकी जीवनी में पढ़ा जिससे वो चौधरी कुम्भाराम आर्य बने
बचपन मे अपने मित्र जयलाल शर्मा के घर लुकाछिपि खेलते वक्त मटकों के पीछे श्री आर्य के छुपने और छू लेने पर उन मटकों को जयलाल शर्मा की माँ द्वारा गुस्से में भरकर लाठी से फोड़ दिया गया। जातिवाद के जहर की घूंट पहली बार पीते ही कुम्भाराम आर्य के मन मे जातिवादी व्यवस्था और पाखंड के प्रति घृणा के बीज अंकुरित हूए और उन्होंने 13 वर्ष की अल्पायु में ही आर्य समाज के साथ स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होकर अपनी जिंदगी, देश एवं जातिविहीन समाज की स्थापना के नाम कर दी।
बचपन मे प्लेग महामारी के कारण गांव छोड़ने के कारण ज्यादा पढ़ नहीं पाए किंतु जातिविहीन किसान कमेरे समाज की स्थापना के लिए शिक्षा के महत्व को भली भाँति जानते थे। जाट छात्रावास का नाम किसान छात्रावास कर उसे समस्त किसान जातियों के लिए अध्ययनशाला उपलब्ध कराने वाले श्री कुम्भाराम आर्य के हिस्से में अनेक उपलब्धियां आईं।
आज किसान शब्द की आड़ में जातिवादी राजनीति करने वाले लोग श्री कुम्भाराम जी आर्य के सपनों के उतने ही हत्यारे हैं, जितने कि अंतर्जातीय विवाह के प्रबल पक्षधर श्री आर्य के जीवन के उत्तरार्ध में वो जातिवादी नारा उनके चिपका देने वाले लोग।
जाट निश्चित रूप से लोकतंत्र में एक जागरूक कौम, कमेरे वर्ग के अभिभावक एवं अग्रेसर की भूमिका में रही है। गाँवो में किसी गरीब के घर तक जाट के घर की छाछ एकता एवं सद्भाव के गीत गुनगुनाती हुई पहुंचती रही है। देश के 85 प्रतिशत उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं के मालिक जाट हैं। बारिश होने पर गरीब किसान के खेत के लिए बीज एवं बैल की व्यवस्था करना जाट का प्रकृति प्रदत्त व्यवहार हुआ करता था। अगर भारत कृषि प्रधान देश है, तो उस के विकास रथ के पहिये की धुरी सदैव जाट रहा है।
आज कुम्भाराम जी आर्य के जन्मदिवस पर संकल्प लेना चाहिये, जातिविहीन कमेरे वर्ग की स्थापना, और लोकतंत्र में उसकी भागीदारी सुनिश्चित करने का।
कुलदीप रियाड़
Kuldeep riyar
Thursday, 28 March 2019
वक्त वक्त की बात है - कुलदीप रियाड़ kuldeep riyar
वक्त वक्त की बात है !
साथियों समय बड़ा बलवान है इसका एक प्रसंग याद आता है मुझे.........
दुनिया में सिकंदर कोई नहीं वक्त सिकंदर होता है हॉलीवुड के एक्शन हीरो और विश्वविख्यात बॉडी बिल्डर ,एथलीट, कैलिफोर्निया गवर्नर रहे 'अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर' Arnold schwarzenegger ने एक फोटो पोस्ट की है। अपनी मूर्ति के नीचे सोते हुए, जो उस होटल में लगी है जिसका फीता उन्होंने कैलिफोर्निया के गवर्नर रहते काटा था। होटल ने उनकी मूर्ति लगाते हुए उन्हें आजीवन होटल मे रूम फ्री में देने की घोषणा की थी। रिटायर होने के बाद एक दिन होटल में रूम मांगने पर होटल ने बुकिंग फुल है कह मना कर दिया।
यह प्रसंग मुझे बहुत प्रेरणादायक लगा क्योंकि समय बदलते वक्त नही लगता...
Make sure you spent it with the right people.
©2019
Thursday, 14 March 2019
"उम्मीद नही छोडूंगा" - कुलदीप रियाड़ Will not leave hope : kuldeep riyar
Wednesday, 13 March 2019
डाबड़ा किसान आंदोलन
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डाबड़ा गाँव राजस्थान के नागौर जिले की डीडवाना तहसील में एक छोटा सा ऐतिहासिक गाँव है। यह वीर योद्धाओं के बलिदानी इतिहास की थर्मो-पल्ली के नाम से जाना जाता है। डाबडा काण्ड भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए काण्डों में सबसे भयंकर था जो अमृतसर के जलियांवाला बाग काण्ड से कमतर नहीं है।
श्री रुघाराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री चुन्नी लाल जी शर्मा - निम्बी जोधा (नागौर)
श्री पन्नाराम जी लोमरोड़ -डाबडा,(नागौर)
श्री नंदराम जी मूंड -अड़कसर (नागौर )
पहले भी कई तूफानों का रूख मोड़ चुके है!!'
लेखक
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कुलदीप रियाड़ खांगटा
Kuldeep riyar
Tuesday, 1 January 2019
वर्ष 2018 के तजुर्बे.... कुलदीप रियाड़ Kuldeep riyar
साल 2018 के तजुर्बे...
शुक्रिया उन लोगों का
जो मुझसे नफरत करते है...
क्योंकि
उन्होंने मुझे मजबुत बनाया...
शुक्रिया उन लोगों का,
जो मुझसे प्यार करते है...
क्योंकि,
उन लोगों ने मेरा दिल,
बड़ा कर दिया...
शुक्रिया उन लोगों का,
जो मेरे लिए परेशान हुए...
और मुझे बताया कि,दरअसल,
वो मेरा बहुत ख्याल रखते है...
शुक्रिया उन लोगों का,
जिन्होंने मुझे अपना बना के छोड़ दिया...
और मुझे अहसास दिलाया कि,
दुनियाँ में हर चीज आखिरी नही होती...
शुक्रिया उन लोगों का,
जो मेरी जिंदगी में शामिल हुए,
और मुझे ऐसा बना दिया,
जैसा मैंने सोचा भी नही था...
और सबसे ज्यादा शुक्रिया मेरे भगवान को,
जिन्होंने हर हालात का सामना करने की मुझे हिम्मत दी
सभी को नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
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©
Kuldeep riyar
कुलदीप रियाड़




















