Thursday, 14 March 2019

"उम्मीद नही छोडूंगा" - कुलदीप रियाड़ Will not leave hope : kuldeep riyar

                      उम्मीद नहीं छोडूँगा
कितने कंटक, प्रस्तर कितने
राहों पर हो चाहे बिखरे
मंजिल तक दौडूँगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
घनी रात है गहन अँधेरा
सूरज ने भी है मुख फेरा
स्याह मिथक तोडूंगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
झंझा झकोर है गर्जन तर्जन
डोल रहा आतंकित मन
प्रचंड वेग मोडूँगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
विश्वास महल हो गया खण्डहर
हिली नींव, गिर गई भींत , पर
फिर नई ईंट जोडूंगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा............."कुलदीप"




No comments:

Post a Comment