डाबड़ा किसान आंदोलन(13 मार्च 1947)
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डाबड़ा गाँव राजस्थान के नागौर जिले की डीडवाना तहसील में एक छोटा सा ऐतिहासिक गाँव है। यह वीर योद्धाओं के बलिदानी इतिहास की थर्मो-पल्ली के नाम से जाना जाता है। डाबडा काण्ड भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए काण्डों में सबसे भयंकर था जो अमृतसर के जलियांवाला बाग काण्ड से कमतर नहीं है।
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डाबड़ा गाँव राजस्थान के नागौर जिले की डीडवाना तहसील में एक छोटा सा ऐतिहासिक गाँव है। यह वीर योद्धाओं के बलिदानी इतिहास की थर्मो-पल्ली के नाम से जाना जाता है। डाबडा काण्ड भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए काण्डों में सबसे भयंकर था जो अमृतसर के जलियांवाला बाग काण्ड से कमतर नहीं है।
आजादी से पहले जमींदारों एवं जागीरदारों के अत्याचार का विरोध करने के लिए गाँव डाबड़ा में जागृति की अलख जगाने के लिए सम्मेलन था उसका उद्देश्य किसान हितों के साथ ही गांवों में शिक्षा का प्रसार , राजनीतिक जागृति तथा समाज में व्यापक बुराइयों को दूर करना था|
लोक परिषद के नेता मथुरादास माथुर ,द्वारका प्रसाद एवं साथियों के नेतृत्व में लगभग 500-600 किसान एकत्रित हुए थे एवं बैठक का समय 11 बजे था परन्तु सभी नेता सुबह साढ़े सात बजे ही डाबड़ा पहुँच गए। वे सीधे चौधरी पन्नाराम लोमरोड़ के घर पहुंचे। पन्नाराम जी ने उनका स्वागत किया और कुछ चर्चाएँ की। इतने में जागीरदार के बुलाये हजारों की तादाद में ऊँटों व घोड़ों पर सवार जागीरदार के सशस्त्र लोगों ने धावा बोल दिया।
जिसमे कई साहित्यकारों का मानना है की लगभग 13 से ज्यादा किसान भाई शहीद हो गए थे जिनमें से कुछ के नाम इस प्रकार है
श्री रामूराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री रुघाराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री चुन्नी लाल जी शर्मा - निम्बी जोधा (नागौर)
श्री पन्नाराम जी लोमरोड़ -डाबडा,(नागौर)
श्री नंदराम जी मूंड -अड़कसर (नागौर )
श्री रुघाराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री चुन्नी लाल जी शर्मा - निम्बी जोधा (नागौर)
श्री पन्नाराम जी लोमरोड़ -डाबडा,(नागौर)
श्री नंदराम जी मूंड -अड़कसर (नागौर )
डाबड़ा गाँव में उनकी यादगार में बने अमर शहीद स्तम्भ प्रांगण पर आज भी शहीद मेले का आयोजन होता है तथा उन वीर योद्धाओं को समस्त मानव जाति नमन कर प्रेरणा लेती है।
डाबड़ा कांड के शहीदों को समर्पित पंक्तियां
"हिम्मत को परखने की गुस्ताखी ना करना,
पहले भी कई तूफानों का रूख मोड़ चुके है!!'
पहले भी कई तूफानों का रूख मोड़ चुके है!!'
जय जवान जय किसान
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लेखक
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
कुलदीप रियाड़ खांगटा
Kuldeep riyar
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कुलदीप रियाड़ खांगटा
Kuldeep riyar
©2019


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