पहले मनन, फिर अगर कर सको तो ध्यान और फिर मताधिकार का प्रयोग !
🔔 मताधिकार की पूर्व संध्या पर यह चौंकाने वाली विडंबना का संदेश जरूर पढ़ें तथा समय निकालकर राष्ट्रहित में चिंतन अवश्य करें,
अपने महत्व को जानिये।
🙏
मान लो भारत की जनसंख्या 1000 है।
1. उसमें से कुल मतदाता लगभग
65% = 650 हुए।
2. सामान्यतः 53% ही मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
अतः 345 लोगों ने वोट डाला और
305 लोगों ने वोट नहीं दिया।
3. कुल वोटिंग का 45% वोट पाने वाली पार्टी सत्ता प्राप्त कर लेती है।
अर्थात 345 का 45%= 155 लोगों की इच्छा से (15.5 प्रतिशत से) सरकार बन जाती है।
4. जो लोग वोट नहीं देते उसमे 95% लोग बुद्धिजीवी वर्ग के होते हैं।
305 का 95%= 290 लोग।
5. ये 290 लोग ही सही आकलन करना जानते हैं,
कि वर्तमान परिस्थितियों में कौन सी पार्टी या नेता की आवश्यकता देश को है।
6. यदि ये 290 लोग
(29 प्रतिशत) चाहें,
तो देश को सही सरकार या सही नेतृत्व उपलब्ध करा सकते हैं।
परन्तु इनकी चुप्पी या चुनाव में मताधिकार प्रयोग ना करने की उदासीनता का खामियाजा देश ने आधी शताब्दी से ज्यादा समय तक भोगा है।
जिसके लिए उनकी पीढ़ियाँ क्या उन्हें माफ करेंगी!!!!
इस वर्ग से मेरा निवेदन--
वफाये वतन की,
इतनी ही रुसवाई है|
लम्हों ने खता की थी,
सदियों ने सजा पाई है
अतः अपने लिए ना सही, अपनी पीढ़ियों के लिए इस बार वोट अवश्य डालना। क्योंकि आप 29 प्रतिशत हैं; जो कि अभी तक बन रही सरकारों (15.5% से बनी सरकार) की तुलना में लगभग दुगने हैं।
✍️✍️✍️✍️✍️
कुलदीप रियाड़
Kuldeep riyar
7 दिसम्बर अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करे
✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️
Sahi baat hai kuldeep ji
ReplyDelete