Wednesday, 10 October 2018

देश की अमूल्य धरोहर : हमारे वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग)

एक बुजुर्ग आदमी था। उसके तीन बेटे थे। उनमें से सबसे बड़ा बेटा अपने पिता का सबसे ज्यादा ख्याल या उनकी देखरेख करता था,उससे छोटे वाला थोड़ी कम देखरेख करता और सबसे छोटे वाला ना के बराबर देखभाल करता था। एक दिन वह बुड्ढा आदमी बीमार पड़ गया तो उसने अपने तीनों बेटों को अपने पास बुलाया और उसके पास कुल 17 ऊँट थे।  उस बीमार व्यक्ति ने अपने तीनों बेटों से कहा कि आप तीनों इन कुल ऊँटो का आपस में बंटवारा इस प्रकार कर लेना की सबसे बड़े बेटे को कुल ऊँटो का 1/2 हिस्सा दे देना तथा उससे छोटे वाले बेटे को कुल का 1/3 हिस्सा दे देना तथा सबसे छोटे वाले बेटे को कुल का 1/9  हिस्सा दे देना। वह बुड्ढा आदमी मर जाता है और उसके बेटों में इस बंटवारे को लेकर आपसी झगड़ा शुरू हो जाता है क्योंकि कुल 17 ऊँटो का बंटवारा किसी भी प्रकार से पूरा नहीं हो पा रहा था। वह आपस में झगड़ते रे और तीनों कोर्ट में चले गए। कोर्ट में जैसा की आप सबको मालूम है कि हमेशा तारीखों पर तारीख के दी जाती है और केस को लंबा खींचा जाता है। इससे धन और समय दोनों की हानि होती है। जब यह बात गांव में किसी बुजुर्ग को पता चलती की उस बुड्ढे आदमी के तीनों बेटे आपसी बंटवारे को लेकर कोर्ट में झगड़ रहे हैं।  वह बुड्ढा आदमी उन तीनों लड़कों को अपने पास बिठाता है और बोलता है कि आप यह मेरा एक ऊँट ले लो और आपसी लड़ाई को छोड़ दो। अब उन तीनों के पास कुल 18 ऊंट हो जाते हैं और उनका आपसी बंटवारे का समीकरण सही से बैठ भी जाता है। जैसा कि उस समीकरण के हिसाब से सबसे बड़े वाले बेटे को कुल ऊँटो का 1/2 यानि 18/2=9 ऊँट पहले वाले को मिलता है। उससे छोटे वाले बेटे को कुल ऊँटो का 1/3 यानि 18/3 = 6 ऊँट मिलते हैं तथा सबसे छोटे वाले को कुल ऊँटो का 1/9 यानि 18/9=2 ऊँट मिलते हैं। अब पहले दूसरे और तीसरे तीनों के बंटवारे के ऊंटों का समीकरण मिलाते हैं पहले को 9 दूसरे को 6 तथा तीसरे को 2 ऊँट मिलते हैं। अब तीनों को आपसे में जोड़ते हैं 9+6+2=17 होता है और वह बुड्ढा आदमी अपना ऊँट वापस लेकर चला जाता है। कहने का मतलब यह है कि अगर आपको कोई एक सही दिशा दे सकता है तो आपका जीवन बदल सकता है!   

इंसान बनने का प्रयास कीजिये,

अमीर तो कोई भी बन सकता है

जीवन में ऊँचे उठते समय, लोगों से सद्व्यवहार रखें।

क्योंकि हो सकता है की अगर आपको नीचे आना पड़ा तो सामना इन्हीं लोगों से होगा।

जीवन का सारांश यही है
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जहां बुजुर्गों के बताये उसूल चलते है
वहां संस्कार खत्म नही होते.....
पुराना पैड अगर फल नही देता है
तो छाया तो.जरूर देगा..
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Kuldeep riyar


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