Wednesday, 12 September 2018

छात्र संघ चुनाव , जातीय विभाजन , मानवता , युवा

छात्र संघ चुनाव & जातीय विभाजन & मानवता & युवा
✍️
छात्र संघ चुनाव नतीजों के बाद लोगों की प्रतिक्रिया देखी , कमेंट पढ़े कि यहां से जाट जीत गया वहां से राजपूत जीत गया उधर दलित जीत गया । इन सब प्रतिक्रियाओं से एक बात समझ मे नहीं आई कि कहीं से कोई नेक इंसान क्यों नहीं जीत पाया ????🤔🤔
इंसानियत कहाँ चली गई हारकर ....??🤔
कहीं से कोई छात्र क्यों नहीं जीत पाया.....??🤔
यह जातियां चुनाव कैसे जीतने लग गई...???🤔🤔
विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते एक बात समझ पाया हूँ कि नेताओं की कोई जाति नहीं होती बल्कि उनका एक वर्ग होता है नेता वर्ग ।
इस वर्ग में सभी धर्म , जाति व सम्प्रदाय के नेता आ जाते हैं । इस वर्ग के लोगों का अपनी जाति से जुड़ाव वोट लेने तक ही सीमित रहता है ।
पुराने लोग कहते थे (हैं ?) कि रोटी बेटी का रिश्ता जाति में होना चाहिये । इस वर्ग का इतिहास देखिये सब समझ आ जायेगा ।
हम सब भारतीय है हमें किसी जाति के लिये आपस में नहीं लड़ना है । आग , बाढ़, भूकम्प आदि आपदाओं ने कभी जाति देखकर बचाव नहीं किया इनमे सभी जातियों के लोग मारे गए हैं ।
"यह जातिगत लड़ाई भी एक राष्ट्रीय आपदा है इससे बचे"               
सादर
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
कुलदीप रियाड़

 

No comments:

Post a Comment