#बलदेवो_राजकुमार_भोमली_जाटा_की
आजादी के समय का प्रसिद्ध गाना "बलदेवो राजकूमार - भोमली जाटा की" , तत्कालीन राजस्थानी ग्रामीण क्षैत्र के किसानों के द्वारा सूनने को मिलता था.
मेरी कोशिश रही कि मैं इस प्रसिद्ध गाने के बोल का आज के समय में विश्लेषण करूं...
'मित्रों सन् सैंतालीस के समय नागौर के किसान परिवार के बलदेव राम मिर्धा राजस्थान की जोधपूर रियासत के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे ।
उन्होंने राजपरिवार की खूब सेवा की और अब समय आ गया था अंग्रेजों सें आजादी का...
तब रियासतों के अधीन जमीनों के पक्के पट्टे बन रहे थे तब तक जाट जाति के लोग ही अधिकतर खेती किया करते थे वो भी रियासती भूमि पर और उस समय जागीरगार उनका खूब शोषण करते थे,
जमीनों के पट्टे इस प्रकार बन रहे थे कि जिस किसी ने जितनी भूमि को बोया है वह उसी के नाम की जाऐगी लेकिन जाट किसान इस बात सें अपरिचित थे,
तभी किसान के बेटे बलेदव राम मिर्धा को इस बात की पहले ही भनक लग गई थी और उन्होंने सभी क्षैत्रों में किसान नेताओं को पत्र लिखकर भैजे कि "किसान ज्यादा सें ज्यादा खेत जौंते"
किसान नेताओं नें छुपके - छुपके यह बात सभी किसानों तक पहूंचाई और किसानों ने बड़े क्षैत्रों में खेत बोऐ ,
फिर क्या था जब जमीन के पट्टे बनने शुरू हुऐ किसानों को उनका हक मिला जिसकी बदौलत ही आज जाट किसानों के पास इतनी बड़ी संख्या में खेत/जमीनें हैं...'
तभी यह गाना प्रसिद्ध हुआ "बलदेवों राजकुमार - भौमली जाटा की"
इसका सही मतलब यहां 'बलदेव' ( यानि "किसान") और 'भोमली' (यानि "जमीन") है...
अर्थात् "किसान राजकुमार बन गऐ व जमीन जाटों की हो गई"
जगत झुरे विनती करे , धिन धिन धरती धाम
एकर पाछो आवजे, जग में मिर्धा बलदेव राम।।
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Kuldeep riyar
9413679619
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