Thursday, 28 March 2019

वक्त वक्त की बात है - कुलदीप रियाड़ kuldeep riyar


वक्त वक्त की बात है !
साथियों समय बड़ा बलवान है इसका एक प्रसंग याद आता है मुझे.........
दुनिया में सिकंदर कोई नहीं वक्त सिकंदर होता है हॉलीवुड के एक्शन हीरो और विश्वविख्यात बॉडी बिल्डर ,एथलीट,  कैलिफोर्निया गवर्नर  रहे 'अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर' Arnold schwarzenegger ने एक फोटो पोस्ट की है। अपनी मूर्ति के नीचे सोते हुए, जो उस होटल में लगी है जिसका फीता उन्होंने कैलिफोर्निया के गवर्नर रहते काटा था। होटल ने उनकी मूर्ति लगाते हुए उन्हें आजीवन होटल मे रूम फ्री में देने की घोषणा की थी। रिटायर होने के बाद एक दिन होटल में रूम मांगने पर होटल ने बुकिंग फुल है कह मना कर दिया।
अपनी ही मूर्ति के पास सोये और लिखा -
"पद और रसूख जाने के बाद दुनिया आपके लिए एक आम आदमी की तरह है" या फिर कहूं "सम्मान हमेशा समय और स्थिति  का होता है पर इंसान उसे अपना समझ लेता है।"
यह प्रसंग मुझे बहुत प्रेरणादायक लगा क्योंकि समय बदलते वक्त नही लगता...
इसके लिये सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा
Time is precious.
Make sure you spent it with the right people.
Blog written by-
Kuldeep riyar  कुलदीप रियाड़
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Thursday, 14 March 2019

"उम्मीद नही छोडूंगा" - कुलदीप रियाड़ Will not leave hope : kuldeep riyar

                      उम्मीद नहीं छोडूँगा
कितने कंटक, प्रस्तर कितने
राहों पर हो चाहे बिखरे
मंजिल तक दौडूँगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
घनी रात है गहन अँधेरा
सूरज ने भी है मुख फेरा
स्याह मिथक तोडूंगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
झंझा झकोर है गर्जन तर्जन
डोल रहा आतंकित मन
प्रचंड वेग मोडूँगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा
विश्वास महल हो गया खण्डहर
हिली नींव, गिर गई भींत , पर
फिर नई ईंट जोडूंगा
उम्मीद नहीं छोडूँगा............."कुलदीप"




Wednesday, 13 March 2019

डाबड़ा किसान आंदोलन

डाबड़ा किसान आंदोलन(13 मार्च 1947)
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डाबड़ा गाँव राजस्थान के नागौर जिले की डीडवाना तहसील में एक छोटा सा ऐतिहासिक गाँव है। यह वीर योद्धाओं  के बलिदानी इतिहास की थर्मो-पल्ली के नाम से जाना जाता है। डाबडा काण्ड भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए काण्डों में सबसे भयंकर था जो अमृतसर के जलियांवाला बाग काण्ड से कमतर नहीं है।
आजादी से पहले जमींदारों एवं जागीरदारों के अत्याचार का विरोध करने के लिए गाँव डाबड़ा में जागृति की अलख जगाने के लिए सम्मेलन था उसका उद्देश्य किसान हितों के साथ ही  गांवों में शिक्षा का प्रसार , राजनीतिक जागृति तथा समाज में व्यापक बुराइयों को दूर करना था|
लोक परिषद के नेता मथुरादास माथुर ,द्वारका प्रसाद एवं साथियों के नेतृत्व में लगभग 500-600 किसान एकत्रित हुए थे एवं बैठक का समय 11 बजे था परन्तु सभी नेता सुबह साढ़े सात बजे ही डाबड़ा पहुँच गए। वे सीधे चौधरी पन्नाराम लोमरोड़ के घर पहुंचे। पन्नाराम जी ने उनका स्वागत किया और कुछ चर्चाएँ की। इतने में जागीरदार के बुलाये हजारों की तादाद में ऊँटों व घोड़ों पर सवार जागीरदार के सशस्त्र लोगों ने धावा बोल दिया।
जिसमे कई साहित्यकारों का मानना है की लगभग 13 से ज्यादा किसान भाई शहीद हो गए थे जिनमें से कुछ के नाम इस प्रकार है
श्री रामूराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री रुघाराम जी लोल, निवासी लाडनू (नागौर)
श्री चुन्नी लाल जी शर्मा - निम्बी जोधा (नागौर)
श्री पन्नाराम जी लोमरोड़ -डाबडा,(नागौर)
श्री नंदराम जी मूंड -अड़कसर (नागौर )
डाबड़ा गाँव में उनकी यादगार में बने अमर शहीद स्तम्भ प्रांगण पर आज भी शहीद मेले का आयोजन होता है तथा उन वीर योद्धाओं को समस्त मानव जाति नमन कर प्रेरणा लेती है।
डाबड़ा कांड के शहीदों को समर्पित पंक्तियां
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"हिम्मत को परखने की गुस्ताखी ना करना,
पहले भी कई तूफानों का रूख मोड़ चुके है!!'
जय जवान जय किसान
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लेखक
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कुलदीप रियाड़ खांगटा
Kuldeep riyar
©2019