Tuesday, 23 October 2018

मुहूर्त का समय : कुलदीप रियाड़ Auspicious beginning time : Kuldeep riyar

                      ।।मुहूर्त का समय।।
जिस दिन जिस वक्त  हमारा जन्म हुआ वही दिन और समय हमारे लिए शुभ है।

जन्म मरण के संदर्भ मे:-

जन्म लेते समय कभी मुहूर्त नही देखा जाता और मरने के लिए भी कोई मुहूर्त नही देखा जाता फिर भी जिंदगी में मुहूर्त देखा जाता है।
शुभ मुहूर्त में जन्मा बच्चा सदैव वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उधोगपति ही होगा क्या?
जैसे किसी सम्पन व्यक्ति अम्बानी , बिल गेट्स के जन्म के मुहूर्त में पैदा हए सारे बच्चे बिल गेट्स या अम्बानी बने क्या?
मेरे हिसाब से सभी दिन औऱ सभी समय शुभ है हमारे लिए, सभी दिन व समय शुभ ही तो है।

सामाजिक क्षेत्र:-

कुंडलिया देखकर विवाह का मुहूर्त निकाला जाता है फिर भी अनेक महिलाएं विधवा और पुरूष विधुर होते हैं।
पत्रिका और कुंडली जोड़कर हुए जोड़ो का तलाक और कुछ की अकाल मृत्यु क्यों होती है, ऐसा क्यों?
मेरे अनुसार जैसे वर्ष में होने वाले 95 % विवाह मुहूर्त के समय नही होते फिर भी मुहूर्त का आग्रह किसलिए?

राजनीतिक क्षेत्र :-

मुहूर्त देखकर चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवार में से एक ही विजयी होता है , शेष सभी हारते है, ऐसा क्यों होता है? या फिर सिर्फ एक का ही मुहूर्त शुभ होता है क्या !
जैसे किसी मंत्री पद की शपथ ग्रहण , मंत्रालय में कार्यभार संभालने का मुहूर्त , कुर्सी पर बैठने का मुहूर्त सबका शुभ मुहूर्त देखा जाता है फिर भी यह पद अल्पकालीन क्यों हो जाता हैं?

नवीन प्रतिष्ठान के शुभारंभ के संदर्भ में:-

उच्च शिक्षित डॉक्टर, इंजीनियर , उद्योगपति अपने प्रतिष्ठान का उदगाटन करते समय मुहूर्त देखकर ही शुरुआत करते है , फिर भी कितनो को अपयश मिलता है, व्यवसाय सफल नही होता उनको उस क्षेत्र को छोड़कर भागना पड़ता है , ऐसा क्यों?

मेरे अनुसार अपने आप पर व अपने कर्मो पर विश्वास रखे , अगर आपका मन निर्मल होगा और प्रयास करने की क्षमता होगी तो  आपको यशस्वी होने से कोई मुहूर्त का समय रोक नही सकता। इसलिए आज व अभी से शुभ अशुभ मुहूर्त में न पड़ते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं  और अपना व दूसरो का समय बर्बाद न करते हुए कर्मयोगी,  परिश्रमी , मेहनतकश , यशस्वी  बने ।।
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लेखक
कुलदीप रियाड़
©2018
नोट:- यह विचार स्वयं के है तथा मेरा उद्देश्य इस लेख के माध्यम से किसी की भावना आहत करना नही है ।
सादर
कुलदीप रियाड़

Sunday, 21 October 2018

हरिवंश राय बच्चन जी की कविता "अमृतसर रेल हादसा" पर सटीक कविता

अमृतसर में  रावण पुतला दहन के दौरान  हुए  रेल हादसे पर सटीक बैठती यह कविता "हरिवंश राय बच्चन जी "
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ना दिवाली होती, और ना पठाखे बजते

ना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होते
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,

…….काश कोई धर्म ना होता....

…….काश कोई मजहब ना होता....
ना अर्ध देते, ना स्नान होता

ना मुर्दे बहाए जाते, ना विसर्जन होता
जब भी प्यास लगती, नदीओं का पानी पीते

पेड़ों की छाव होती, नदीओं का गर्जन होता
ना भगवानों की लीला होती, ना अवतारों

का नाटक होता

ना देशों की सीमा होती , ना दिलों का

फाटक होता
ना कोई झुठा काजी होता, ना लफंगा साधु होता

ईन्सानीयत के दरबार मे, सबका भला होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,

…….काश कोई धर्म ना होता.....

…….काश कोई मजहब ना होता....
कोई मस्जिद ना होती, कोई मंदिर ना होता

कोई दलित ना होता, कोई काफ़िर ना

होता
कोई बेबस ना होता, कोई बेघर ना होता

किसी के दर्द से कोई बेखबर ना होता
ना ही गीता होती , और ना कुरान होती,

ना ही अल्लाह होता, ना भगवान होता
तुझको जो जख्म होता, मेरा दिल तड़पता.

ना मैं हिन्दू होता, ना तू भी मुसलमान होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता।
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लेखक
हरिवंशराय बच्चन
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संकलन कर्ता
कुलदीप रियाड़

Wednesday, 10 October 2018

देश की अमूल्य धरोहर : हमारे वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग)

एक बुजुर्ग आदमी था। उसके तीन बेटे थे। उनमें से सबसे बड़ा बेटा अपने पिता का सबसे ज्यादा ख्याल या उनकी देखरेख करता था,उससे छोटे वाला थोड़ी कम देखरेख करता और सबसे छोटे वाला ना के बराबर देखभाल करता था। एक दिन वह बुड्ढा आदमी बीमार पड़ गया तो उसने अपने तीनों बेटों को अपने पास बुलाया और उसके पास कुल 17 ऊँट थे।  उस बीमार व्यक्ति ने अपने तीनों बेटों से कहा कि आप तीनों इन कुल ऊँटो का आपस में बंटवारा इस प्रकार कर लेना की सबसे बड़े बेटे को कुल ऊँटो का 1/2 हिस्सा दे देना तथा उससे छोटे वाले बेटे को कुल का 1/3 हिस्सा दे देना तथा सबसे छोटे वाले बेटे को कुल का 1/9  हिस्सा दे देना। वह बुड्ढा आदमी मर जाता है और उसके बेटों में इस बंटवारे को लेकर आपसी झगड़ा शुरू हो जाता है क्योंकि कुल 17 ऊँटो का बंटवारा किसी भी प्रकार से पूरा नहीं हो पा रहा था। वह आपस में झगड़ते रे और तीनों कोर्ट में चले गए। कोर्ट में जैसा की आप सबको मालूम है कि हमेशा तारीखों पर तारीख के दी जाती है और केस को लंबा खींचा जाता है। इससे धन और समय दोनों की हानि होती है। जब यह बात गांव में किसी बुजुर्ग को पता चलती की उस बुड्ढे आदमी के तीनों बेटे आपसी बंटवारे को लेकर कोर्ट में झगड़ रहे हैं।  वह बुड्ढा आदमी उन तीनों लड़कों को अपने पास बिठाता है और बोलता है कि आप यह मेरा एक ऊँट ले लो और आपसी लड़ाई को छोड़ दो। अब उन तीनों के पास कुल 18 ऊंट हो जाते हैं और उनका आपसी बंटवारे का समीकरण सही से बैठ भी जाता है। जैसा कि उस समीकरण के हिसाब से सबसे बड़े वाले बेटे को कुल ऊँटो का 1/2 यानि 18/2=9 ऊँट पहले वाले को मिलता है। उससे छोटे वाले बेटे को कुल ऊँटो का 1/3 यानि 18/3 = 6 ऊँट मिलते हैं तथा सबसे छोटे वाले को कुल ऊँटो का 1/9 यानि 18/9=2 ऊँट मिलते हैं। अब पहले दूसरे और तीसरे तीनों के बंटवारे के ऊंटों का समीकरण मिलाते हैं पहले को 9 दूसरे को 6 तथा तीसरे को 2 ऊँट मिलते हैं। अब तीनों को आपसे में जोड़ते हैं 9+6+2=17 होता है और वह बुड्ढा आदमी अपना ऊँट वापस लेकर चला जाता है। कहने का मतलब यह है कि अगर आपको कोई एक सही दिशा दे सकता है तो आपका जीवन बदल सकता है!   

इंसान बनने का प्रयास कीजिये,

अमीर तो कोई भी बन सकता है

जीवन में ऊँचे उठते समय, लोगों से सद्व्यवहार रखें।

क्योंकि हो सकता है की अगर आपको नीचे आना पड़ा तो सामना इन्हीं लोगों से होगा।

जीवन का सारांश यही है
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जहां बुजुर्गों के बताये उसूल चलते है
वहां संस्कार खत्म नही होते.....
पुराना पैड अगर फल नही देता है
तो छाया तो.जरूर देगा..
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Kuldeep riyar