Friday, 25 May 2018

किसान केसरी बलदेव राम मिर्धा

#बलदेवो_राजकुमार_भोमली_जाटा_की

आजादी के समय का प्रसिद्ध गाना "बलदेवो राजकूमार - भोमली जाटा की" , तत्कालीन राजस्थानी ग्रामीण क्षैत्र के किसानों के द्वारा सूनने को मिलता था.

मेरी कोशिश रही कि मैं इस प्रसिद्ध गाने के बोल का आज के समय में विश्लेषण करूं...

'मित्रों सन् सैंतालीस के समय नागौर के किसान परिवार के बलदेव राम मिर्धा राजस्थान की जोधपूर रियासत के वरिष्ठ  पुलिस अधिकारी  थे ।
उन्होंने राजपरिवार की खूब सेवा की और अब समय आ गया था अंग्रेजों सें आजादी का...
तब रियासतों के अधीन जमीनों के पक्के पट्टे बन रहे थे तब तक जाट जाति के लोग ही अधिकतर खेती किया करते थे वो भी रियासती भूमि पर और उस समय जागीरगार उनका खूब शोषण करते थे,
जमीनों के पट्टे इस प्रकार बन रहे थे कि जिस किसी ने जितनी भूमि को बोया है वह उसी के नाम की जाऐगी लेकिन जाट किसान इस बात सें अपरिचित थे,
तभी किसान के बेटे बलेदव राम मिर्धा को इस बात की पहले ही भनक लग गई थी और उन्होंने सभी क्षैत्रों में किसान नेताओं को पत्र लिखकर भैजे कि "किसान ज्यादा सें ज्यादा खेत जौंते"
किसान नेताओं नें छुपके - छुपके यह बात सभी किसानों तक पहूंचाई और किसानों ने बड़े क्षैत्रों में खेत बोऐ ,
फिर क्या था जब जमीन के पट्टे बनने शुरू हुऐ किसानों को उनका हक मिला जिसकी बदौलत ही आज जाट किसानों के पास इतनी बड़ी संख्या में खेत/जमीनें हैं...'

तभी यह गाना प्रसिद्ध हुआ "बलदेवों राजकुमार - भौमली जाटा की"
इसका सही मतलब  यहां 'बलदेव' ( यानि "किसान") और 'भोमली' (यानि "जमीन") है...

अर्थात् "किसान राजकुमार बन गऐ व जमीन जाटों की हो गई"
जगत झुरे विनती करे , धिन धिन धरती धाम
एकर पाछो आवजे, जग में मिर्धा बलदेव राम।।
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Kuldeep riyar
9413679619

Tuesday, 15 May 2018

एक बार वापस आ जाओ बाबा महेंद्र सिंह टिकैत

किसानो के मसीहा और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे स्व. श्री महेन्द्र सिंह टिकैत जी की सातवी पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन

जिनका लोहा माना जाता था एक छोटी सी बात उनके बारे में....
👉लखनऊ जिले में धारा 144 लगी हुई थी। सभाओं पर पूरी तरह प्रतिबन्ध था। कलेक्ट्रेट में तो समूह बनाकर घुसने तक की मनाही थी। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक गंवार सा दिखने वाला नेता न सिर्फ कलेक्ट्रेट में समर्थकों से साथ घुस जाता है बल्कि बैटरी वाले माइक से अपना सम्बोधन शुरू कर देता है। यह कलेक्ट्रेट था पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर बुंदेलखंड के झाँसी का। न सिर्फ इतना, बल्कि डीएम के आदेश पर माइक बंद कराने पहुंचे एक पुलिसकर्मी को माइक पर ही दहाड़ते हुए इस नेता ने कहा था - 'कलक्टर हमारा मालिक नहीं है। उसे हमारी आवाज से दिक्क्त है, तो दफ्तर छोड़कर बाहर चला जाए।' शेर की तरह दहाड़ने वाला और किसानों के लिए किसी पत्थर के चट्टान की तरह खड़े होने वाला यह किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के अलावा दूसरा कौन हो सकता है।
👉उनके जाने के बाद देश में किसान राजनीति कमजोर हुई है।
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Kuldeep Riyar

Wednesday, 9 May 2018

दिल्ली विजय दिवस की शुभकामनाएं

सभी बन्धुओं को आज दिल्ली विजय दिवस की शुभकामनाएँ
आज ही के दिन 1753 में हमारे महान पूर्वज महाराजा सूरजमल जाट जी दिल्ली पर विजय हासिल की थी 😊

'आखा' गढ गोमुखी बाजी ,  माँ भई देख मुख राजी ।।धन्य धन्य गंगिया माजी , जिन जायो सूरज मल गाजी ।।
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Kuldeep Riyar