Wednesday, 12 September 2018

छात्र संघ चुनाव , जातीय विभाजन , मानवता , युवा

छात्र संघ चुनाव & जातीय विभाजन & मानवता & युवा
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छात्र संघ चुनाव नतीजों के बाद लोगों की प्रतिक्रिया देखी , कमेंट पढ़े कि यहां से जाट जीत गया वहां से राजपूत जीत गया उधर दलित जीत गया । इन सब प्रतिक्रियाओं से एक बात समझ मे नहीं आई कि कहीं से कोई नेक इंसान क्यों नहीं जीत पाया ????🤔🤔
इंसानियत कहाँ चली गई हारकर ....??🤔
कहीं से कोई छात्र क्यों नहीं जीत पाया.....??🤔
यह जातियां चुनाव कैसे जीतने लग गई...???🤔🤔
विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते एक बात समझ पाया हूँ कि नेताओं की कोई जाति नहीं होती बल्कि उनका एक वर्ग होता है नेता वर्ग ।
इस वर्ग में सभी धर्म , जाति व सम्प्रदाय के नेता आ जाते हैं । इस वर्ग के लोगों का अपनी जाति से जुड़ाव वोट लेने तक ही सीमित रहता है ।
पुराने लोग कहते थे (हैं ?) कि रोटी बेटी का रिश्ता जाति में होना चाहिये । इस वर्ग का इतिहास देखिये सब समझ आ जायेगा ।
हम सब भारतीय है हमें किसी जाति के लिये आपस में नहीं लड़ना है । आग , बाढ़, भूकम्प आदि आपदाओं ने कभी जाति देखकर बचाव नहीं किया इनमे सभी जातियों के लोग मारे गए हैं ।
"यह जातिगत लड़ाई भी एक राष्ट्रीय आपदा है इससे बचे"               
सादर
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कुलदीप रियाड़

 

Saturday, 8 September 2018

Delhi diary यात्रा वृतांत by Kuldeep Riyar

                           Delhi diary

                            यात्रा वृतांत

कल शाम को नई दिल्ली मे एक होटल पर डिनर करने गया,

वहा एक छोटा सा लडका था जो ग्राहको को खाना खिला रहा था।
कोई ऐ छोटू कह कर बुलाता तो कोई ओए छोटू वो नन्ही सी जान ग्राहको के बीच जैसे उलझ कर रह गयी हो ।
यह सब मेरे मन को काट रहा था ।
मैने छोटू को "छोटू जी" कहकर अपनी
तरफ बुलाया ।
वह भी प्यारी सी मुस्कान
लिये मेरे पास आकर बोला,"साहबजी क्या खाओगे ?

"मैने कहा,"साहब नही भैया बोल ! तब ही बताऊगाँ ।"

वो भी मुस्कुराया और आदर के साथ बोला,

भैया जी आप क्या खाओगे?

मैने खाना आर्डर किया और खाने लगा ।

छोटू जी के लिये अब मे ग्राहक से जैसे मेहमान बन  चुका था ।
वो मेरी एक आवाज पर दौडा चला आता और प्यार से
पूछता,
"भैया  जी और क्या लाये, खाना अच्छा तो लगा ना
आपको???
"और मै कहता,"
हाँ छोटू जी !
आपके इस प्यार ने खाना और स्वादिष्ट कर दिया ।

"खाना खाने के बाद मैने बिल चुकाया और 100 रू छोटूजी की हाथ पर रख,

"कहा ये तुम्हारे है, रख लो और अपने मालिक से मत कहना है।

"वो खुश होकर बोला,"

जी भैया  

"फिर मैने पुछा,"

क्या करोगे इन पैसो का ।

"वो खुशी से बोला,"

आज माँ के लिये चप्पल ले जाऊगाँ, 4 दिन से माँ के पास चप्पल नही है, नँगे पैर ही चली।।

मेने पूछा क्या करती है माँ आपकी

"जाती है साहब लोग के यहाँ बर्तन माझने ।"

उसकी ये बात सुन मेरी आँखे भर आयी । 

मैने पुछा,

"घर पर कौन कौन है ??"

तो बोला,"

माँ है, मै और छोटी बहन है, पापा भगवान के पास चले गये सात महीने पहले ।"

मेरे पास कहने को अब कुछ नही रह गया था । मैने व मेरे भाई ने उसको कुछ पैसे और दिये और बोला,"आज सेव ले जाना माँ के लिये और माँ के लिये अच्छी सी चप्पल लाकर देना और बहन औरअपने लिये आईसक्रीम ले जाना और अगर माँ पुछे किसने दिया तो कह देना पापा के दोस्त थे एक भैया  वो दे गये ।

"इतना सुन छोटू मुझसे लिपट गया" 

वास्तव में छोटू अपने घर का बड़ा निकला ।
पढाई की उम्र मे घर का बोझ उठा रहा है।

ऐसे ही ना जाने कितने ही छोटू आपको होटल, ढाबो या चाय की दुकान पर काम करतेमिल जायेगे । आप सभी से इतना निवेदन है उनको नौकर की तरह ना बुलाये,थोडा प्यार से कहे।।

खाना बेचता हैं सबके के पास जा - जा कर...

उम्र जिसकी खुद किताबें  खरीदने की है!!

#मजबूर बचपन

#दिल्ली की यात्रा

#DelhiTrip

#SaveChildhood

©2018

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 Kuldeep riyar

अंत मे सिर्फ इतना लिखूंगा 

हे खुदा !

मेरी किस्मत में तू लिख तो सही एक दिन मेरी मर्जी का

हर गरीब का सहारा बन जाऊंगा ।।