एक ऐसा व्यक्तित्व जिससे में हर समय सकारात्मक रहता हूं , जीवन जीने की प्रेरणा "(दादा) दीनबंधु रहबरे आजम चौधरी सर छोटूराम "
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जब भी आपकी जीवनी पढ़ता हूं तो उसे मेरे शब्दों में भी लिखने का एक छोटा सा प्रयास करता हूं यहीं मेरी ओर से आपके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी .......💐
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सर छोटूराम तांगा लेकर गांव गांव जाते थे|
ग्रामीणों से मिलकर वे उनकी तात्कालिक मांगों , कठिनाइयों और जिंदगी की परेशानियों से रुबरु होते थे।
धीरे धीरे सर छोटूराम के दिमाग में ये बात घर करती चली गई मेहनत करने वाले किसानों, मजदूरों, दस्तकारों और दूसरे पिछड़े वर्गों की परेशानियों का कारण सिर्फ अंग्रेजी साम्राज्य की पालिसी हीं नहीं है बल्कि काफी हद तक भारतीय भी इन परेशानियों का कारण है।
सरकारी टैक्स, मालगुजारी आबियाना और दूसरी सरकारी वसूलियां नाजायज भी है और कानून के खिलाफ है
लेकिन साहूकारों के बही-खाते झूठे सच्चे कर्जे और उन पर सूद की दर, मण्डियों की हेरा फेरी , भावों में उतार चढाव, मण्डियों में धर्म खाते के नाम पर लगाये हुए कर और वसूलियां, तखडियों और बट्टो का फर्क नाजायज वसूलियां ये सब मिलकर देहात वालों का अंग्रेजी शासन से भी ज्यादा शोषण कर रही हैं।
इसलिए इन शोषणों से भी आजादी जरूरी है।
कांणी डांडी ,कच्चे बाट
खड़ी कर दें थे जमींदार की खाट!!
फिर आए सर छोटूराम...
ना रही वो ताखडी ना रहे वो बाट!
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Kuldeep Riyar
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