Saturday, 28 April 2018

मै सोने की चिड़िया वाला हिन्दुस्तान ढूंढ़ रहा हूं 🧐

अंधों की बस्ती में आईने की दुकान ढूंढ रहा हूं
मैं इंसानों में आजकल इंसान ढूंढ रहा हूं

अमन शांति भाईचारा यह सब सुना तो बहुत है
कहीं देख भी पाउ बस ऐसा एक जहान ढूंढ रहा हूं

पागल हूं जो सोचता हूं, कि पीतल भी सोना हो जाएगा
बेईमानों की बस्ती में इमान ढूंढ रहा हूं

जहर बहुत घोला है शब्दों ने हवाओं में
बस जुबा मीठी कर दे ऐसे पकवान ढूंढ रहा हूं

दिल्लगी ना सही बस दिल को ही लग जाए
उस हसीन चेहरे की एक मुस्कान ढूंढ रहा हूं

आजाद तो है फिर भी गुलामी सी लगती है
वह सोने की चिड़िया वाला हिंदुस्तान ढूंढ रहा हूं
✍️✍️✍️✍️✍️
Kuldeep Riyar ©

Sunday, 22 April 2018

पुरुष प्रधान समाज की विडम्बना

एक बार किसी साधु महात्मा को उनके उपदेशों से प्रभावित हो एक स्त्री ने उन्हें अपने घर खाने का निमंत्रण दिया । साधु निमंत्रण स्वीकार कर उस औरत के घर भोजन के लिए चल पड़े । रास्ते में जब लोगों ने उस स्त्री के साथ साधु को देखा तो, एक आदमी उनके पास आया और बोला कि आप इस औरत के साथ कैसे? संत  ने बताया कि वह इस औरत के निमंत्रण पर उसके घर भोजन के लिए जा रहे हैं, यह जानने के बाद उस व्यक्ति ने कहा कि आप इस औरत के घर न जाऐं आप की अत्यंत बदनामी होगी क्योंकि यह औरत चरित्रहीन है। इसके बावजूद साधु न रुके, कुछ ही देर में यह बात जंगल में आग की तरह फैल गई। आनन फानन में गांव का मुखिया दौडता हुआ आ गया और साधु  से उस औरत के यहां न जाने का अनुरोध करने लगा। विवाद होता देख साधु ने सबको शांत रहने को कहा, फिर मुस्कराते हुए मुखिया का एक हाथ अपने हाथ में कस कर पकड़ लिया और बोले क्या अब तुम ताली बजा सकते हो? मुखिया बोला एक हाथ से भला कैसे ताली बजेगी । इस पर साधु मुस्कुराते हुए बोले जैसे एक हाथ से ताली नहीं बज सकती तो अकेली स्त्री कैसे "चरित्रहीन" हो सकती है जब तक कि एक पुरुष उसे  चरित्रहीन बनने पर बाध्य न करे। चरित्रहीन पुरुष ही एक स्त्री को चरित्रहीन बनाने में जिम्मेदार है। यह कैसी विडम्बना है कि इस कथित " पुरुष प्रधान समाज के अभिमान में ये पुरुष अपनी झूठी शान के लिए स्त्री को केवल अपने उपभोग की वस्तु भर समझता है और भूल जाता है कि जिस स्त्री को वह चरित्रहीन कह रहा है उसका जिम्मेदार वह स्वयं है।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
अपनी सोच को बदलिए !
न ही ऐसे कर्म करे !
बदलाव की पहल खुद से शुरू करे ......


"मिजाज यूं ही ना चिड़चिड़ा कीजिये
कोई बातें छोटी करे तो आप दिल बड़ा कीजिये.."
©
Kuldeep Riyar




Tuesday, 17 April 2018

ऐसे थे बाबा महेंद्र सिंह टिकैत व चौधरी अजित सिंह

ऐसे थे बाबा महेंद्र सिंह टिकैत , चौधरी अजित सिंह
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
बात सन 2008 की हैं जिला मुजफ्फरनगर में पूरे भारत ने जाटों की ताकत को माना था मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक के पुत्र पंकज मलिक ने अधिकारी की बदसलूकी से नाराज होकर उस अधिकारी की बढिया मरम्मत कर दी मायावती सरकार में पंकज मलिक और उनके 4 साथियों पर कई संगीन धाराये लगी जनवरी की सर्दियों में जाटों ने ऐलान कर दिया पंकज मलिक की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे पंकज मलिक के 3 साथी गिरफ्तार कर लिए। सर छोटूराम जाट डिग्री कालेज के मैदान में पंचायत रखी गई वह मैदान कभी किसी रैली में इतना नहीं भरा था जितनी जनता उस दिन थी मंच पर चौधरी अजित सिंह, चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत, चौधरी हरेन्द्र मलिक और भी कई जाट नेता उपस्थित थे वह आखिरी पल था जब पश्चिमी उ०प्र० के सारे जाट नेताओं को एक साथ देखा था चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी ने घोषणा कर दी या तो टैम देख कर ठीक 10 मिनट में म्हारे बालकों कू यहाँ म्हारे धोरे लादो या 11 वी मिनट में हम सारे जाट जेल तोड़ के खुद ले आवेंगे बाबा की बात सुनकर सारा मैदान गुंज गया हालत यही हो गई थी कि जाटों का गुस्सा देख पूरा मुजफ्फरनगर शहर अपने घरों में चले गए थे बाबा की बात सुनकर प्रशासन के कान खड़े हुए 6 मिनट के अंदर सारे लडके बाहर आ गये थे ये थी जाटों की ताकत। आज ये चीजें सुनने में असंभव लगती हैं परंतु बाबा टिकैत के सामने ऐसे ऐसे काम हुए हैं कि सुनने वाले चकित हो जाते हैं अगर आज बाबा टिकैत जी जीवित होते तो किसानों की ऐसी हालत नहीं होती और नहीं जाटों के बेकसूर लडके जेलों में रहते। हमे अपनी ताकत दोबारा बनानी होगी वरना सरकार इतना शोषण कर देगी कि हम खुद ही खत्म हो जाएंगे।

जय किसान जय जवान
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
लेखक :-
कुलदीप रियाड़

Monday, 16 April 2018

सुन्दरता का मूल्य

                !! सुन्दरता तन की या मन की !!
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
एक अति सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई।
उस 'सुंदर' महिला ने एयरहोस्टेस से बोला "मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों हाथ नहीं हैं।" उस सुन्दर महिला ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया।
असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, "मैम क्या मुझे कारण बता सकती है..?"
'सुंदर' महिला ने जवाब दिया "मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी।"
दिखने में पढी लिखी और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला की यह बात सुनकर एयरहोस्टेस अचंभित हो गई। महिला ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि "मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती। अतः मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए।"
एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी।
एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि "मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट खाली नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है। अतः मैं विमान के कप्तान से बात करती हूँ। कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें।" ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई।
कुछ समय बाद लोटने के बाद उसने महिला को बताया, "मैडम! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है | इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है। मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है।"
'सुंदर' महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती... एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा "सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे..? क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा कर के परेशान हों।
यह बात सुनकर सभी यात्रियों ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अति सुन्दर दिखने वाली महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी।
तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा, "मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ। और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे। सबसे पहले, जब मैंने इन देवी जी की चर्चा सुनी, तब मैं सोच रहा था। की मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये..? लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों की खातिर अपने दोनों हाथ खोये।"और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए।
'सुंदर' महिला पूरी तरह से शर्मिंदा होकर सर झुकाए सीट पर बैठ गई।
"अगर विचारों में उदारता नहीं है तो ऐसी सुंदरता का कोई मूल्य नहीं है।"
✍️✍️✍️✍️✍️✍️
Kuldeep riyar

Sunday, 15 April 2018

दीनबंधु रहबरे आजम चौधरी छोटूराम

एक ऐसा व्यक्तित्व जिससे में हर समय सकारात्मक रहता हूं , जीवन जीने की प्रेरणा "(दादा) दीनबंधु रहबरे आजम  चौधरी सर छोटूराम "
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जब भी आपकी जीवनी पढ़ता हूं तो उसे मेरे शब्दों में भी लिखने का एक छोटा सा प्रयास करता हूं यहीं मेरी ओर से आपके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी .......💐
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
सर छोटूराम तांगा लेकर गांव गांव जाते थे|
ग्रामीणों से मिलकर वे उनकी तात्कालिक मांगों , कठिनाइयों और जिंदगी की परेशानियों से रुबरु होते थे।
धीरे धीरे सर छोटूराम के दिमाग में ये बात घर करती चली गई मेहनत करने वाले किसानों, मजदूरों, दस्तकारों और दूसरे पिछड़े वर्गों की परेशानियों का कारण सिर्फ अंग्रेजी साम्राज्य की पालिसी हीं नहीं है बल्कि काफी हद तक भारतीय भी इन परेशानियों का कारण है।
सरकारी टैक्स, मालगुजारी आबियाना और दूसरी सरकारी वसूलियां नाजायज भी है और कानून के खिलाफ है

लेकिन साहूकारों के बही-खाते झूठे सच्चे कर्जे और उन पर सूद की दर, मण्डियों की हेरा फेरी , भावों में उतार चढाव, मण्डियों में धर्म खाते के नाम पर लगाये हुए कर और वसूलियां, तखडियों और बट्टो का फर्क नाजायज वसूलियां ये सब मिलकर देहात वालों का अंग्रेजी शासन से भी ज्यादा शोषण कर रही हैं।
इसलिए इन शोषणों से भी आजादी जरूरी है।

कांणी डांडी ,कच्चे बाट
खड़ी कर दें थे जमींदार की खाट!!
फिर आए सर छोटूराम...
  ना रही वो ताखडी ना रहे वो बाट!
✍️✍️✍️✍️
Kuldeep Riyar

Change your thought

दोस्तों प्रोफ़ाइल चित्र बदलने से कुछ नहीं होगा अगर हकीकत में बदलाव लाना चाहते हो तो अपनी सोच बदलो !
#RespectWomen's
#saveGirls
#JusticeForAsifa
राह चलती लड़की को मौका नहीं, जिम्मेदारी समझे कि वो सुरक्षित घर पहुंचे !
बड़ी बाते करने से कुछ नहीं होगा बदलाव कि पहल  खुद से करे !
जय हिन्द🇮🇳🇮🇳
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
kuldeep riyar

Wednesday, 4 April 2018

कलयुग


युधिष्ठर को पूर्ण आभास था,
कि कलयुग में क्या होगा ?
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था।

पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान
ढूंढ रहे थे।

उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाय।

शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।

अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी
और वो आकर्षित हो गया ,

भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।

भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे,

भीम बोला- मुझे महल देखना है!

शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है ।

1- शर्त महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं।
2-शर्त महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।
3-शर्त अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।

भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा ।

और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया ।

वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा,

आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ।

बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है।

दरबान - क्या देखा आपने ?

भीम- महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया।

दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया।

अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया।

आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल ।

बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा
मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही । अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।

दरबान ने पूछा क्या देखा,

अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।

शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं ।

नकुल आया बोला
मुझे महल देखना है ।

फिर वह उत्तर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है उसे कुछ समझ नहीं आया द्वार पर आया ।

शनिदेव ने पूछा क्या देखा ?

नकुल बोला महाशय गाय बछियों का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया।

सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।

चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये।

भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है।

युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ?

भीम ने कुंऐ के बारे में बताया

तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे।

भीम को छोड़ दिया।

अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ??

उसने फसल के
बारे में बताया

युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है।
वंश परिवर्तन अर्थात उच्च घर  की लड़की निम्न के और निम्न  के घर उच्च की लड़की ब्याही जायेंगी।

अर्जुन भी छूट गया।

नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया ।

तब युधिष्ठिर ने कहा- कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे ।

तब नकुल भी छूट गया।

सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृतांत बताया,

तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म , संस्कार फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।।  आज के कलयुग में यह
सारी बातें सच
साबित हो रही है ।।
मित्रो आपके आस पास के वातावरण का ध्यान रखे , सकारात्मक सोच वाले साथी चुने ।😊
अंत में सारांश के रूप में दो पंक्तियां लिख रहा हूं-

क्या खूब कहा हैं किसी ने संगत का जरा ध्यान रखना साहब....
संगत आपकी ख़राब होगी और बदनाम माँ-बाप और संस्कार होंगे....
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
कुलदीप रियाड़
_________________________________________

Monday, 2 April 2018

इरादे

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

इरादे चाहे कितने भी नेक क्यों नहीं,
अगर जताने का तरीका सही नहीं ,
तो
खुदा भी अजान को आदत समझ लेता है !