देश की बेटी !
यही लड़की अगर प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, या प्रिया प्रकाश होती तो सोशल मीडिया पर रातों-रात छा जाती...लेकिन जनाब यह तो एक गरीब किसान की बेटी है, जिसने फेसबुक या इंस्टाग्राम पर बिना डबल फिल्टर के, बिना नारीवादी कविता के अपनी फोटो अपलोड किए हुए भारत का नाम रोशन किया है...वह भी दो हफ्तों में 5 स्वर्ण पदक जीतकर...पर हैरानी की बात यह है कि अधिकतर लोगो को इसकी जानकारी तक नहीं है !
धन्य है असम का वह धान उगाने वाला एक गरीब किसान परिवार, जिसने एक दृढ़ संकल्पित और जिद्दी खिलाड़ी भारत को दिया है...जिसके लिए यह मुल्क उनका कर्जदार रहेगा !
उसके पास सप्लीमेंट और प्रोटीन कभी नहीं थे, वो सिर्फ दाल-चावल खाकर इस मुकाम तक पहुँची है...वह स्टेडियम के पक्के ट्रैक पर नहीं दौड़ पाई, क्योंकि उसके लिए तो खेतों के कच्चे रास्ते ही उसके अपने और अपने देश के सपने पूरे करने के लिए काफी थे...उसने कभी समाज, अपने माँ-बाप और परिस्थितियों को नहीं गलियाया, बल्कि अपने जुनून और हुनर से हालात को, जमाने को निरुत्तर कर अपना इकबाल बुलंद किया !
जब उसने देश के लिए विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थी, क्योंकि बैकग्राउंड में राष्ट्रीय गान चल रहा था...ये आँसूं गोल्ड मेडल के कारण नही थे; बल्कि ये आँसूं भारत का नाम रौशन करने के लिए थे, मुल्क के सम्मान में थे...इतना ही नहीं, उसके मन में मुल्क के लिए अपनापन और मिट्टी से जुड़ाव इतना गहरा है कि हाल ही में असम में आई बाढ से पीड़ितों के लिए अपने पदक की राशि भी दान कर दी !
यही लड़की अगर प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, या प्रिया प्रकाश होती तो सोशल मीडिया पर रातों-रात छा जाती...लेकिन जनाब यह तो एक गरीब किसान की बेटी है, जिसने फेसबुक या इंस्टाग्राम पर बिना डबल फिल्टर के, बिना नारीवादी कविता के अपनी फोटो अपलोड किए हुए भारत का नाम रोशन किया है...वह भी दो हफ्तों में 5 स्वर्ण पदक जीतकर...पर हैरानी की बात यह है कि अधिकतर लोगो को इसकी जानकारी तक नहीं है !
धन्य है असम का वह धान उगाने वाला एक गरीब किसान परिवार, जिसने एक दृढ़ संकल्पित और जिद्दी खिलाड़ी भारत को दिया है...जिसके लिए यह मुल्क उनका कर्जदार रहेगा !
उसके पास सप्लीमेंट और प्रोटीन कभी नहीं थे, वो सिर्फ दाल-चावल खाकर इस मुकाम तक पहुँची है...वह स्टेडियम के पक्के ट्रैक पर नहीं दौड़ पाई, क्योंकि उसके लिए तो खेतों के कच्चे रास्ते ही उसके अपने और अपने देश के सपने पूरे करने के लिए काफी थे...उसने कभी समाज, अपने माँ-बाप और परिस्थितियों को नहीं गलियाया, बल्कि अपने जुनून और हुनर से हालात को, जमाने को निरुत्तर कर अपना इकबाल बुलंद किया !
जब उसने देश के लिए विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थी, क्योंकि बैकग्राउंड में राष्ट्रीय गान चल रहा था...ये आँसूं गोल्ड मेडल के कारण नही थे; बल्कि ये आँसूं भारत का नाम रौशन करने के लिए थे, मुल्क के सम्मान में थे...इतना ही नहीं, उसके मन में मुल्क के लिए अपनापन और मिट्टी से जुड़ाव इतना गहरा है कि हाल ही में असम में आई बाढ से पीड़ितों के लिए अपने पदक की राशि भी दान कर दी !
इसे कहते हैं, देश की बिटिया ! स्वर्णपरी !


