Thursday, 23 August 2018

सोशल मीडिया का वर्तमान संदर्भ में उपयोग

सोशल मीडिया के माध्यम से समय व धन की बचत करके राष्ट्र को मजबूत कैसे कर सकते??
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👉 फ्री में बैलेंस, मोबाइल, पेनड्राइव, टीशर्ट आदि के लिए मैसेज भेजना बन्द करें।
👉2-2 साल पुराने मैसेज को मार्किट में नया है कहकर फारवर्ड करते रहते हैं। जैसे फलां जगह बच्ची मिली है इसे घर वालों तक पहुंचाओ। इनमें तारीख़ नहीं होती। तारीख़ होती तो पोल खुल जाती।ऐसे मैसेज भेजना बन्द करें।
👉 ऐसे एक्सीडेंट की खबरे भेजते हैं, जो 2 साल पहले हुआ था। इनमें भी तारीख़ कभी नहीं होती।ऐसे मैसेज कभी किसी को नहीं भेजे।
👉 देवी देवताओं की फ़ोटो या नाम लिखकर कसम देकर लोगों को फारवर्ड करके अपनी बला ग्रुप के मेम्बरों पर चिपकाते हैं।अगर देवी देवताओं की फ़ोटो भेजने व नाम लिखने से किसी का भला होता तो किसी को काम करने की जरूरत ही नहीं थी।घर बैठे बैठे यही काम करते।
👉 "पुजारी मंदिर में पूजा कर रहा था फिर एक सांप/बन्दर आया और उसने इंसान का रूप ले लिया" इसे आगे भेजो लाटरी निकल जायेगी।ऐसे मैसेज किसी को मत भेजो कोई फायदा नहीं है।
👉 अभी अभी पैदा हुए बच्चे के गले में आलपिन फंस गई, ओपरेशन के 50 लाख लगेंगे।कौनसे ऑपरेशन में 50 लाख लगते हैं भाई ?  ऊपर से बोलेंगे कि प्रति शेयर 50 पैसा व्हाट्सऐप की तरफ से मिलेगा। जबकि सच्चाई ये है कि किसी को कुछ नहीं मिलता है।
👉सबसे बड़ी बेवकूफी तो तब होती है जब कोई कहता है कि- "मैसेज आगे भेजो आपकी बैटरी फुल चार्ज हो जायगी", घोडा दौड़ने लगेगा, भैंस का रंग बदल जायेगा या  ताला खुल जायेगा।ऐसे मैसेज भेजने वाले लोग देश व समाज का कभी भला नहीं कर सकते।
👉 किसी आदमी के डॉक्यूमेंट, डिग्रियाँ गिर गए हैं, ये मैसेज उस तक पहुचाने में मदद करें.ऐसे मेसेज डॉक्यूमेंट मिलने के बाद छः छः महीने तक चलते हैं।
👉अगर हमें समाज को मजबूत करना है तो समय व धन दोनों की बचत करनी होगी।ऐसे मैसेज हमारे समय व धन दोनों को बर्बाद कर रहे हैं।सबसे बड़ा नुकसान तो यह होता है कि ऐसे मैसेजों से कई काम के मैसेज नहीं पढ़ पाते हैं।
👉याद रखो दुनियां में सब से कीमती समय है और हमारी वजह से किसी इंसान का एक सेकंड भी बर्बाद होता है तो हम उस व्यक्ति के गुनहगार है।अपना समय व धन बर्बाद करो आपको कोई नहीं रोकेगा क्योकि हम किसी की मानते नहीं है बाकी लोग सावधान तो करते हैं।लेकिन ऐसे बिना काम के कॉपीपेस्ट मैसेजों से दूसरों का धन व समय बर्बाद करने का अधिकार भी हमें नहीं है।
👉जिसके दिल में देश समाज व वर्तमान में गिरते मानवीय मूल्य के प्रति दर्द है वो मेरी बात पर घोर करें।जिनको किसी से कोई मतलब नहीं वो अपना काम जारी रखे।
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कुलदीप रियाड़
Kuldeep riyar

Wednesday, 8 August 2018

स्वयं की आंख

स्वयं की आंख

एक आदमी अंधा था।
उसके आठ लड़के थे, आठ बहुएं थीं। चिकित्सकों ने कहा कि तुम्हारी आंख ठीक हो सकती है, आपरेशन करना होगा। उसने कहा, क्या करेंगे? फायदा क्या है?

मेरी पत्नी के पास दो आंखें हैं, मेरे आठ लड़कों के पास सोलह आंखें हैं, मेरी आठ बहुओं के पास सोलह आंखें हैं। ऐसी चौतीस आंखें मुझे उपलब्ध हैं। दो न हुईं मेरी, क्या फर्क पड़ता है?

लेकिन संयोग की बात! जिस दिन उसने यह इंकार किया उसी रात घर में आग लग गई। वे चौतीस आंखें भागकर बाहर निकल गईं।

अंधा चिल्लाता रहा, टटोलता रहा रास्ता। लपटों में जल-भुनकर गिरकर मर गया। मरते वक्त एक ही भाव उसके मन में था, अपनी आंख अगर आज होती…!

जो बाहर भागकर निकल गए–पत्नी, बेटे, बहुएं, उनको याद आयी उसकी, लेकिन बाहर जाकर याद आयी। जब अपने प्राण संकट में पड़े हों तो किसको किसकी याद आती है?

"अपनी आंख"

आंखवालों से सीख लेना, मगर अपनी आंख के अतिरिक्त किसी और की आंख को अपना सहारा मत बनाना।अपनी आंख जब तक न मिल जाए, सीखना, साधना; लेकिन चेष्टा यही रखना कि अपनी आंख मिल जाए। अपनी आंख से ही कोई सत्य का दर्शन कर पाता है।सत्य के साक्षात के लिए स्वयं की आंख के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है।।
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कुलदीप रियाड़