Saturday, 18 November 2017

बाबा महेंद्र सिंह जी टिकैत को नमन

नमन करता हूं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह जी को

 नमन करता हूं बाबा महेंद्र सिंह टिकैत जी को

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अच्छाई की मार्केटिंग......
चौधरी चरण सिंह को राजघाट के बगल में समाधि हेतु जगह कैसे मिली थी 

1987 की बात हैं। 29 मई 1987 को महान किसान नेता चौधरी चरण सिंह दुनिया को अलविदा कह गये थे। केन्द्र में राजीव गाँधी की सरकार थी। चौधरी चरण सिंह के अनुयायी दिल्ली में उनकी समाधि के लिए जमीन की माँग कर रहे थे। राजीव गाँधी ने साफ मना कर दिया था कि दिल्ली में चौधरी चरण सिंह की समाधि नहीं बन सकती। तब बङे किसान नेता रहे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में लाखों किसानों ने दिल्ली कूच किया और राजीव गाँधी को धमकी दी कि अगर किसानों के भगवान चौधरी चरण सिंह की समाधि के लिए 48 घंटे में जमीन नहीं दी गयी तो वे गैंती और कुदालियों से महात्मा गाँधी, इंदिरा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू की समाधियों को खोदना चालू कर देंगे। टिकैत के पीछे खङे अपार जन समर्थन को देखते हुए मजबूरी में राजीव गाँधी को चौधरी साहब की समाधि के लिए 48 घंटे में जमीन देनी पङी थी। देश के किसानों को आज ऐसे ही किसी महेंद्र सिंह टिकैत की जरूरत है।

यह पहचान और दबंगई ज़रूरी है खून में खाली डिप्लोमेटिक होने से काम नहीं चलता...!! जाटो का स्वभाव अड़ियल,हट्टी,दबंग,निडर रहता है इसे कायम रखो...!!😎💪💪
लेखक
कुलदीप रियाड़ खांगटा

Friday, 3 November 2017

शहीद ए आजम सरदार भगतसिंह जी को नमन

💐💐 शहीद भगत सिहं को नमन 💐💐

जिसके जीवन की शैली ने हिम्मत को परिभाषा दी
जिसके पिस्टल की गोली ने इंकलाब को भाषा दी
जिसने धरा गुलामी वाली क्रांति निकेतन कर डाली
आजादी के हवन कुंड में अग्नि चेतन कर डाली
जिसको खूनी मेंहदी से भी देह रचाना आता था
आजादी का योद्धा केवल नमक चबेना खाता था
अब तो नेता पर्वत सड़कें नहरों को खा जाते हैं
नए जिलों के शिलान्यास में शहरों को खा जाते हैं
@कुलदीप रियाड़